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Wednesday, June 3, 2026

कार्यबाही : बीईओ की संस्तुति पर अटेवा जिलाध्यक्ष पर निलंबन की गाज

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फर्रुखाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग ने जनगणना कार्य और विद्यालयीय दायित्वों में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अटेवा शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निलंबन आदेश में नरेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विकासखंड बढ़पुर स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
जारी आदेश के अनुसार 27 मई को खंड शिक्षा अधिकारी कमालगंज सुरेश चंद्र पाल द्वारा किए गए निरीक्षण में प्राथमिक विद्यालय कुत्तूपुर बघार तथा कंपोजिट विद्यालय रतनपुर में तैनात शिक्षकों की उपस्थिति की जांच की गई थी। निरीक्षण के दौरान शिक्षक विद्यालय में अनुपस्थित पाए गए। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार प्राथमिक विद्यालय कुत्तूपुर बघार की शिक्षामित्र गीता वर्मा तथा कंपोजिट विद्यालय रतनपुर के सहायक अध्यापक नरेंद्र सिंह विद्यालय में मौजूद नहीं मिले। निरीक्षण के बाद अनुपस्थित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था। लेकिन शिक्षक खंड शिक्षा अधिकारी को संतुष्ट नहीं कर पाये जिस क्रम मे बीईओ ने जांच रिपोर्ट सौप दी।बीएसए द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि नरेंद्र सिंह की जनगणना कार्य में ड्यूटी लगी हुई थी और इस आधार पर उन्होंने अपना पक्ष रखा, लेकिन विभाग ने माना कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लगे होने के बावजूद संबंधित अधिकारी को पूर्व सूचना देना और विभागीय नियमों का पालन करना आवश्यक था। आदेश में उल्लेख किया गया है कि शिक्षक द्वारा अपने पदीय दायित्वों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई तथा विद्यालय और विभागीय कार्यों के प्रति लापरवाही बरती गई।
निलंबन आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी कर्मचारी होने के नाते शिक्षक को विभागीय निर्देशों और नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यदि किसी कर्मचारी को किसी अन्य सरकारी कार्य, जैसे जनगणना, में लगाया जाता है तो भी उसे अपनी उपस्थिति और कार्य की सूचना संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करानी होती है। विभाग ने नरेंद्र सिंह के स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं मानते हुए अनुशासनहीनता और कर्तव्यों के प्रति उदासीनता का मामला माना है।आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में नरेंद्र सिंह का मुख्यालय ब्लॉक संसाधन केंद्र बढ़पुर रहेगा तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही एक सप्ताह के भीतर आरोप पत्र का बिंदुवार उत्तर प्रस्तुत करने और विभागीय जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में शिक्षक राजनीति का प्रमुख चेहरा माने जाने वाले अटेवा जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह पर हुई इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच नई बहस छेड़ दी है। एक ओर विभाग इसे अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं शिक्षक संगठनों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल विभाग ने साफ संकेत दे दिया है कि चाहे मामला जनगणना ड्यूटी का हो या विद्यालयी कार्य का, सरकारी दायित्वों के निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कार्रवाई से छूट नहीं मिलेगी।

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