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Friday, April 24, 2026

राजेपुर क्षेत्र में लिंग परीक्षण व अवैध गर्भपात के गंभीर आरोप, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

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अमृतपुर/फर्रुखाबाद

जनपद के राजेपुर क्षेत्र में अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटरों और निजी क्लीनिकों के संचालन को लेकर चौंकाने वाले आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के नियमों के विपरीत कई केंद्र खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जहां कथित रूप से लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात जैसी गतिविधियां की जा रही हैं। इन आरोपों ने पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ क्लीनिकों में कथित तौर पर लगभग 15 हजार रुपये लेकर लिंग जांच किए जाने की चर्चा है। इसके बाद गर्भ में पल रहे शिशु को लेकर अवैध रूप से गर्भपात कराए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है।
बताया जा रहा है कि राजेपुर से लेकर शाहजहांपुर सीमा तक कई स्थानों पर बिना वैध पंजीकरण और मानकों के क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। कई जगहों पर प्रशिक्षित चिकित्सकों की अनुपस्थिति में ही इलाज किया जा रहा है। एक ही डॉक्टर के नाम पर कई स्थानों पर डिग्रियां लगाकर क्लीनिक चलाने और झोलाछाप व्यक्तियों द्वारा पूरे अस्पताल का संचालन किए जाने की बात भी सामने आई है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि गर्भवती महिलाओं से पहले सामान्य प्रसव के नाम पर धन वसूला जाता है और स्थिति बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। वहां इलाज के नाम पर 40 से 50 हजार रुपये तक का बिल थमा दिया जाता है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। कभी-कभार औपचारिक कार्रवाई कर कुछ केंद्रों को बंद किया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद उनके दोबारा संचालित होने की बात सामने आती है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
क्षेत्र में चर्चा है कि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन प्रभावी निगरानी और सख्त कार्रवाई के अभाव में यह नेटवर्क लगातार फल-फूल रहा है। आमजन का कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो इसके सामाजिक और कानूनी दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं।
इस संबंध में जब उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो संपर्क स्थापित नहीं हो सका।

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