– उनके मिशन को आगे बढ़ा रहे उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ अनार सिंह यादव, और समूचा परिवार
प्रशांत कटियार
फर्रुखाबाद। किसी भी जिले की पहचान केवल उसके इतिहास या भूगोल से नहीं, बल्कि वहां की शिक्षा व्यवस्था और संस्थानों से बनती है। जनपद फर्रुखाबाद में यदि उच्च शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की बात होती है, तो श्री बाबू सिंह यादव ‘दद्दू जी’ का नाम अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम मानते हुए ऐसे संस्थानों की नींव रखी, जो आज हजारों विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।
दद्दू जी की प्रेरणा से स्थापित मेजर एस.डी. सिंह विश्वविद्यालय आज जनपद की सबसे प्रमुख निजी विश्वविद्यालयों में शामिल है। विश्वविद्यालय में 30 से अधिक प्रोफेशनल स्ट्रीम, 60 से अधिक पाठ्यक्रम, 8 से अधिक मान्यताएं एवं मान्यता संस्थाओं की स्वीकृतियां तथा 50 एकड़ से अधिक विस्तृत परिसर है। यहां इंजीनियरिंग, फार्मेसी, नर्सिंग, कृषि, विधि, विज्ञान, वाणिज्य, कला, आयुर्वेद सहित अनेक संकाय संचालित हैं।
दद्दू जी की शिक्षा यात्रा केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रही। उनकी सोच से स्थापित श्री बाबू सिंह दद्दू जी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल क्षेत्र में आयुर्वेद चिकित्सा और चिकित्सा शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। संस्थान में विशाल पुस्तकालय, हर्बल गार्डन, आधुनिक प्रयोगशालाएं, छात्र-छात्राओं के लिए अलग छात्रावास तथा शिक्षण अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
आयुष मंत्रालय के उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संस्थान को 100 बीएएमएस तथा 12 स्नातकोत्तर सीटों की स्वीकृति प्राप्त है। इससे हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आयुर्वेद चिकित्सा की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और देशभर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शिक्षाविदों का मानना है कि बाबू सिंह यादव ‘दद्दू जी’ ने उस समय शिक्षा के क्षेत्र में निवेश किया, जब ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता था। उनके प्रयासों से फर्रुखाबाद आज उच्च शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। हजारों छात्र-छात्राओं को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने के साथ-साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
बाबू सिंह यादव ‘दद्दू जी’ द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थान उनकी दूरदृष्टि, समाज सेवा और शिक्षा के प्रति समर्पण की जीवंत पहचान बने हुए हैं। फर्रुखाबाद के विकास में उनका योगदान एक ऐसे शिक्षा पुरुष के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने ज्ञान की ज्योति जलाकर जिले को नई दिशा और नई पहचान दी।


