अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के दौरान एक नया और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। जांच एजेंसी द्वारा प्राण प्रतिष्ठा समारोह के समय रामलला को भेंट किए गए बहुमूल्य हार और चरण पादुका से संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि इन उपहारों के संबंध में स्पष्ट रिकॉर्ड, रसीद या वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान जौनपुर के विश्वकर्मा परिवार द्वारा भेंट किए गए हार और चरण पादुका के संबंध में कई लोगों से पूछताछ की गई है। इनमें रामशंकर यादव टिन्नू, कृष्णदेव तिवारी तथा रामलला के पुजारियों के बयान भी शामिल हैं। पूछताछ में अलग-अलग जानकारियां सामने आने के बाद जांच एजेंसी पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
बताया जा रहा है कि एक पुजारी ने अपने बयान में कहा है कि हार पहनाने के बाद उसे संबंधित व्यक्ति को वापस सौंप दिया गया था, जबकि दूसरी ओर यह दावा किया गया कि हार को आगे की प्रक्रिया के लिए बेंगलुरु भेजा गया था। इन बयानों के बाद जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित हार और चरण पादुका वर्तमान में कहां हैं तथा उनका आधिकारिक रिकॉर्ड किस रूप में दर्ज किया गया था।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि “हार और चरण पादुका को गलाकर सोना हजम कर लिया गया” जैसे आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और उनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
यदि जांच में रिकॉर्ड की कमी, प्रक्रिया में अनियमितता या संपत्ति के गबन जैसी कोई बात सामने आती है तो संबंधित एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर सकती हैं। फिलहाल पूरा मामला जांचाधीन है और अंतिम सत्य एसआईटी की रिपोर्ट तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।


