– स्वास्थ्य और भोजन व्यवस्था पर दागे गए सवाल
फर्रुखाबाद। जिला कारागार फतेहगढ़ में उस समय प्रशासनिक हलचल तेज हो गई जब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण फर्रुखाबाद के न्यायाधीश/सचिव युगल शंभू ने अचानक औचक निरीक्षण कर दिया। यह निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि जेल की अंदरूनी व्यवस्थाओं की कई परतें खोल गया।
निरीक्षण के दौरान न्यायाधीश ने सीधे बैरकों में पहुंचकर बंदियों से संवाद किया। सूत्रों के अनुसार कई बंदियों ने अपने लंबित मामलों को लेकर देरी, वकीलों की अनुपलब्धता और सुनवाई में लापरवाही जैसी गंभीर शिकायतें सामने रखीं। मौके पर ही न्यायाधीश ने विधिक राय देकर मामलों के शीघ्र निस्तारण का भरोसा दिलाया।
इस दौरान उनके साथ लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ सुरेंद्र कुमार राणा भी मौजूद रहे, जिन्होंने कई बंदियों के केस की फाइलों की स्थिति पर बारीकी से जानकारी जुटाई।
निरीक्षण का सबसे अहम पहलू जेल की मूलभूत व्यवस्थाओं की जांच रहा। न्यायाधीश ने जेल की पाठशाला और भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया, जहां गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। सूत्र बताते हैं कि भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए सुधार के निर्देश दिए गए, क्योंकि पहले भी जेलों में घटिया भोजन को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
इसके अलावा अस्पताल बैरक का निरीक्षण भी किया गया, जहां भर्ती बंदियों के स्वास्थ्य की स्थिति पर गंभीरता से समीक्षा की गई। वहां मौजूद चिकित्सक डॉ. नीरज कुमार को इलाज की गुणवत्ता सुधारने और नियमित मॉनिटरिंग के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान असिस्टेंट प्रशांत गुप्ता, डिप्टी जेलर वैभव कुशवाहा समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक, यह औचक निरीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब प्रदेश की जेलों में भीड़, लंबित मुकदमों और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उत्तर प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों की समस्या पहले ही उजागर हो चुकी है, जिससे व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
फतेहगढ़ जेल में न्यायाधीश का औचक छापा: बंदियों के मामलों की खुली परतें


