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Thursday, April 2, 2026

दूध कारोबार में बड़ी राहत, मिलावट पर शिकंजा—FSSAI के नए नियम लागू

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✓ लाइसेंस अब, लाइफ टाइम।
✓ टर्नओवर सीमा बढ़ी (छोटों को राहत)
– ₹1.5 करोड़ तक → सिर्फ Registration
– ₹1.5–50 करोड़ → State License
– ₹50 करोड़+ → Central License

अनुराग तिवारी

नई दिल्ली। देश में खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने वर्ष 2026 में लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं। इन बदलावों का सबसे अधिक प्रभाव डेयरी क्षेत्र, दूध व्यापारियों, मिल्क कलेक्शन सेंटर और छोटे खाद्य व्यवसायों पर पड़ेगा।

नए नियमों का मकसद साफ है—व्यापार को आसान बनाना, लागत कम करना और आम जनता को सुरक्षित व शुद्ध खाद्य उपलब्ध कराना। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को बार-बार नवीनीकरण कराने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत लाइसेंस को जीवनभर के लिए वैध (Perpetual Validity) कर दिया गया है। यानी यदि कोई डेयरी संचालक या दूध व्यवसायी नियमों का पालन करता है, तो उसे बार-बार लाइसेंस रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, नियमों का उल्लंघन करने पर लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है।

इसके साथ ही FSSAI ने कारोबार की श्रेणियों के लिए टर्नओवर सीमा में भी बड़ा बदलाव किया है। अब ₹1.5 करोड़ तक के कारोबार को केवल रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होगी, ₹1.5 करोड़ से ₹50 करोड़ तक के कारोबार के लिए स्टेट लाइसेंस और ₹50 करोड़ से अधिक के लिए सेंट्रल लाइसेंस अनिवार्य होगा। इससे उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में छोटे और मध्यम स्तर के डेयरी कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी और उन्हें कम कागजी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

हालांकि नियमों में ढील के बावजूद डेयरी सेक्टर को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा गया है, जिस कारण इस क्षेत्र में गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर कोई समझौता नहीं किया गया है। दूध में मिलावट, गंदगी, या अस्वच्छ तरीके से संग्रहण और बिक्री पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। डेयरी संचालकों को साफ बर्तन, स्वच्छ टैंक, ठंडा रखने की व्यवस्था (कोल्ड चेन) और नियमित गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द और यूनिट सील तक की कार्रवाई की जा सकती है।

जांच प्रणाली में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब पारंपरिक निरीक्षण की बजाय Risk-Based Inspection System लागू किया गया है, जिसमें उन व्यवसायों की जांच कम होगी जो नियमों का पालन करते हैं, जबकि शिकायत या गड़बड़ी मिलने पर संबंधित इकाइयों पर सख्त और बार-बार कार्रवाई होगी। इससे ईमानदार कारोबारियों को राहत मिलेगी और लापरवाह लोगों पर शिकंजा कसा जाएगा।

नए नियमों के तहत राज्य सरकारों की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। अब लगभग 98 प्रतिशत खाद्य व्यवसाय राज्य सरकारों के दायरे में आएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर निगरानी, निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इससे उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव छोटे व्यापारियों के लिए राहत भरे जरूर हैं, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट संदेश भी देते हैं कि खाद्य सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डेयरी और खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता, गुणवत्ता और नियमों का पालन प्राथमिकता से करना होगा।

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