नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वित्त विधेयक 2026 (Finance Bill) को लोकसभा (Lok Sabha) में पारित कर दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे सदन में पेश किया, जिसमें कई महत्वपूर्ण संशोधन शामिल किए गए हैं। इन बदलावों का असर खास तौर पर बड़े कर मामलों और एमएसएमई सेक्टर पर देखने को मिलेगा। निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि भारत तेज़ी से आर्थिक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ये सुधार किसी बाहरी दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि सरकार की स्पष्ट नीति, मजबूत इरादों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।
लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2025 का नया आयकर अधिनियम विवादों को कम करने और अनुपालन को आसान बनाने में मदद करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार करदाताओं के लिए कर प्रणाली को सरल बना रही है, जिससे न केवल कर प्रक्रिया सहज होगी बल्कि मुकदमों और विवादों में भी कमी आएगी।
वित्त मंत्री ने कर प्रणाली को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य एक ऐसा टैक्स सिस्टम बनाना है जो पारदर्शी, सरल और करदाताओं के लिए सुविधाजनक हो। उन्होंने बताया कि ईमानदार करदाताओं को कम से कम परेशानियों का सामना करना पड़े, इसके लिए कर प्रशासन में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। डिजिटल प्रक्रियाओं और यूज़र-फ्रेंडली सिस्टम से टैक्स फाइलिंग अब पहले से अधिक आसान हो रही है।
विधेयक के प्रमुख संशोधन के तहत अब आयकर विभाग को यह अधिकार दिया गया है कि वह पहले से बंद हो चुके टैक्स मामलों को दोबारा खोल सके। यदि किसी टैक्स विवाद को अदालत या ट्रिब्यूनल द्वारा बंद कर दिया गया है, लेकिन फैसले में ऐसे तथ्य सामने आते हैं जिनसे पुनर्मूल्यांकन की जरूरत बनती है, तो विभाग उस फाइल को फिर से जांच के लिए खोल सकता है।


