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Thursday, March 19, 2026

यूपी में जुलाई 2026 तक होंगे पंचायत चुनाव

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ओबीसी आरक्षण 2011 जनगणना के आधार पर तय—सरकार का बड़ा फैसला

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति पर राज्य सरकार ने विराम लगा दिया है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव हर हाल में जुलाई 2026 तक संपन्न करा लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओबीसी आरक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिसके तहत अगली कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी जाएगी और आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई नई जनगणना नहीं कराई जाएगी और पूर्व में लागू आरक्षण चक्र को ही जारी रखा जाएगा।
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आयोग के गठन के बाद उसकी रिपोर्ट मिलते ही पंचायतों की सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा और इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया जाएगा। इससे पहले आरक्षण को लेकर बनी अनिश्चितता अब समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे चुनाव प्रक्रिया में तेजी आएगी।
वहीं, इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती। वर्तमान में प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसे देखते हुए समयबद्ध चुनाव प्रक्रिया जरूरी हो गई है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची ने कोर्ट में दलील दी थी कि प्रदेश में ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसके अनुसार उनका पांच वर्ष का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा और इसके बाद चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में पूर्व के “प्रेम लाल पटेल केस” का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार चुनाव की तिथियां तय करने की शक्ति अपने हाथ में नहीं ले सकती, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 243(क) के तहत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण केवल राज्य निर्वाचन आयोग के पास ही निहित है। सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से 25 मार्च तक हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराने की क्या तैयारी है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत में वर्तमान कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए समय मांगा गया है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल भले अलग-अलग समय पर समाप्त हो रहे हों, लेकिन किसी भी पद का कार्यकाल जुलाई 2026 से आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है।
सरकार के इस स्पष्ट रुख और हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएंगे और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भी किसी प्रकार की देरी नहीं होगी।

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