नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नहयान से फोन पर विस्तृत बातचीत कर पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में हाल के दिनों में हमलों और सैन्य गतिविधियों के चलते अस्थिरता बढ़ी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय शांति को प्रभावित करती हैं, बल्कि निर्दोष नागरिकों की जान भी लेती हैं और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ खड़ा है।
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने माना कि यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। किसी भी प्रकार की बाधा से न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति को आगामी ईद की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। साथ ही, दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने तथा मौजूदा हालात में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
वार्ता के दौरान यह भी सहमति बनी कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बहाल करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज किया जाएगा। दोनों देशों ने आतंकवाद, चरमपंथ और किसी भी प्रकार की हिंसात्मक गतिविधियों के खिलाफ मिलकर सख्त रुख अपनाने की जरूरत पर बल दिया।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं के चलते खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में भारत और यूएई जैसे महत्वपूर्ण साझेदार देशों के बीच यह उच्चस्तरीय संवाद क्षेत्र में स्थिरता लाने और वैश्विक हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


