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Sunday, March 15, 2026

कताई मिल के श्रमिकों का फूटा गुस्सा, 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्य द्वार पर किया प्रदर्शन

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कंपिल (फर्रुखाबाद)। उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल से जुड़े श्रमिकों का वर्षों से चला आ रहा असंतोष रविवार को खुलकर सामने आ गया। अपनी लंबित मांगों और बकाया भुगतान को लेकर बड़ी संख्या में श्रमिक मिल के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। ‘उप्र सहकारी कताई मिल संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले आयोजित बैठक में सैकड़ों श्रमिकों ने हिस्सा लिया और प्रशासन को 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।

बैठक का नेतृत्व मोर्चा के महामंत्री मानसिंह ने किया। उन्होंने बताया कि श्रमिकों की समस्याओं को सुनने और मांगपत्र लेने के लिए तहसीलदार के आने की सूचना दी गई थी, लेकिन उनके न पहुंचने पर श्रमिक प्रतिनिधियों ने अपना मांगपत्र थाना कंपिल के प्रभारी निरीक्षक नितिन कुमार को सौंप दिया। श्रमिकों ने उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं को शासन और प्रशासन तक गंभीरता से पहुंचाया जाएगा।

मोर्चा के अध्यक्ष हरीश कुमार शर्मा द्वारा हस्ताक्षरित मांगपत्र में श्रमिकों ने कई अहम मुद्दे उठाए हैं। श्रमिकों का आरोप है कि मिलों में बिना अनुमति के ‘ले-ऑफ’ लागू कर दिया गया, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक बैठकी झेलनी पड़ी। ऐसे में उस अवधि का पूरा वेतन, बोनस और अन्य बकाया भुगतान 9.5 प्रतिशत ब्याज के साथ दिए जाने की मांग की गई है। श्रमिकों का यह भी कहना है कि कुछ मिलों में 30 प्रतिशत वेतन कटौती के साथ काम कराया गया, जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है।

श्रमिकों ने वर्ष 2019 में लागू की गई वीआरएस और ग्रेच्युटी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पूरी नहीं की गई, जिससे कई कर्मचारियों को उनका पूरा हक नहीं मिल सका। ऐसे में सभी लंबित देयकों का भुगतान ब्याज सहित किए जाने की मांग की गई है।

कंपिल स्थित मिल के कर्मचारियों के संदर्भ में श्रमिकों ने बताया कि भविष्य निधि (पीएफ) की राशि फंड कमिश्नर के आदेश के बावजूद करीब ढाई वर्षों से जमा नहीं कराई गई है। इसके अलावा मृतक श्रमिकों की विधवाओं को भी अन्य कर्मचारियों की तरह पेंशन का लाभ दिए जाने की मांग उठाई गई।

मांगपत्र में यह प्रस्ताव भी रखा गया कि यदि बंद पड़ी मिलों की जमीन पर नया उद्योग स्थापित किया जाता है तो श्रमिक परिवार के एक सदस्य को योग्यता के आधार पर रोजगार दिया जाए। वहीं यदि उस जमीन पर आवासीय कॉलोनी विकसित की जाती है तो श्रमिकों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाए।

श्रमिकों ने यह भी कहा कि किसानों को देरी से भुगतान होने पर 12 प्रतिशत ब्याज दिए जाने की व्यवस्था है, इसलिए श्रमिकों के बकाया भुगतान पर भी इसी प्रकार का उचित ब्याज दिया जाना चाहिए। साथ ही कार्य के दौरान दुर्घटना में दृष्टि गंवा चुके श्रमिकों के लिए यूएएन नंबर जारी कराकर सरकारी सहायता दिलाने की मांग भी रखी गई।

श्रमिक संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बैठक के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।

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