नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और तेज हो गया है। ईरान की सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया है कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में अमेरिकी नौसेना के शक्तिशाली युद्धपोत USS Abraham Lincoln (CVN-72) को निशाना बनाया गया है। ईरान का कहना है कि इस हमले के बाद अमेरिकी युद्धपोत को खाड़ी क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा, हालांकि अमेरिका ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
आईआरजीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ओमान के समुद्री क्षेत्र में तैनात अमेरिकी युद्धपोत को सटीक बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले से निशाना बनाया गया। ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि यह हमला ईरान की समुद्री सीमा से लगभग 340 किलोमीटर दूर किया गया। ईरानी पक्ष का कहना है कि हमले के बाद युद्धपोत और उसके साथ मौजूद अन्य युद्धपोतों के समूह को क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा और जहाज को नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते वह सामान्य रूप से काम करने की स्थिति में नहीं रहा।
हालांकि इन दावों के समर्थन में ईरान की ओर से कोई ठोस प्रमाण या तस्वीरें जारी नहीं की गई हैं।
वहीं अमेरिका ने ईरान के इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि युद्धपोत पूरी तरह सुरक्षित है और अपने सैन्य अभियान में सक्रिय है। अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command ने युद्धपोत की ताजा तस्वीर जारी करते हुए कहा कि USS Abraham Lincoln (CVN-72) अपने अभियान के तहत लगातार सैन्य कार्यों में लगा हुआ है और किसी हमले की पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह का हमला वास्तव में हुआ होता तो यह अमेरिका के लिए बेहद बड़ा सैन्य झटका माना जाता, क्योंकि यह युद्धपोत अमेरिकी नौसेना की सबसे शक्तिशाली युद्ध क्षमता का प्रतीक माना जाता है।
यह युद्धपोत परमाणु ऊर्जा से संचालित विशाल समुद्री युद्धपोतों की श्रेणी में आता है, जिसे अमेरिकी नौसेना में 1989 में शामिल किया गया था। करीब 97 हजार टन वजन वाला यह युद्धपोत लगभग 1092 फीट लंबा है और इसकी उड़ान पट्टी लगभग 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। इस पर चार बड़े विमान उठाने-गिराने वाले यंत्र लगे हैं और यह अपने साथ लगभग 90 लड़ाकू विमान ले जाने की क्षमता रखता है।
इस युद्धपोत पर अमेरिका के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं और करीब पांच हजार से अधिक नौसैनिक, मरीन और अन्य कर्मचारी इसकी संचालन व्यवस्था संभालते हैं। यह युद्धपोत इतना विशाल है कि इसमें अस्पताल, पुस्तकालय, अग्निशमन केंद्र, जनरल स्टोर, रेडियो केंद्र, टेलीविजन केंद्र और यहां तक कि अपना अलग डाक कोड तक मौजूद है।
पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के बीच इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक तेल आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और दुनिया की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
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