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Thursday, March 12, 2026

आलू के गिरते दाम से फर्रुखाबाद का किसान संकट में

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– जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल करीब 2,28,830 हेक्टेयर, लगभग 1 लाख हेक्टेयर में आलू की खेती; हर साल करीब 50 लाख कुंतल उत्पादन

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक जिलों में शामिल फर्रुखाबाद में इस वर्ष आलू के गिरते दामों ने किसानों को गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया है। जिले में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होने के बावजूद बाजार में कीमतों में भारी गिरावट से किसान अपनी लागत तक निकाल पाने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।

जानकारी के अनुसार फर्रुखाबाद जिले का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 2,28,830 हेक्टेयर है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा कृषि कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है और लगभग 1 लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है। जिले में हर वर्ष करीब 50 लाख कुंतल आलू का उत्पादन होता है। यही कारण है कि फर्रुखाबाद को प्रदेश के प्रमुख आलू उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है और हजारों किसान प्रत्यक्ष रूप से आलू की खेती पर निर्भर हैं।

किसानों का कहना है कि इस बार आलू की खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी पर काफी अधिक खर्च आया है। एक हेक्टेयर में आलू की खेती पर औसतन 70 से 90 हजार रुपये तक लागत आती है। इसके बावजूद मंडियों में आलू का भाव काफी नीचे चला गया है। कई स्थानों पर किसानों को केवल 300 से 400 रुपये प्रति कुंतल तक कीमत मिल रही है, जबकि लागत निकालने के लिए कम से कम 800 से 1000 रुपये प्रति कुंतल का भाव जरूरी माना जा रहा है।

कोल्ड स्टोरेज भी भरने लगे

फर्रुखाबाद जिले में बड़ी संख्या में कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं, लेकिन इस बार उत्पादन अधिक होने के कारण कई कोल्ड स्टोरेज तेजी से भर गए हैं। छोटे किसान भंडारण का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में कम दाम पर आलू बेचना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि यदि आलू के दाम इसी तरह गिरते रहे तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज भी लिया है और इस स्थिति में कर्ज चुकाना भी उनके लिए कठिन हो सकता है। किसानों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को आलू के दाम स्थिर रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

किसानों की मांग है कि आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) तय किया जाए या बाजार में हस्तक्षेप कर किसानों को उचित मूल्य दिलाया जाए। गिरते दामों के कारण इस समय फर्रुखाबाद का आलू किसान चिंता और असमंजस की स्थिति में है और उसे सरकार से जल्द राहत की उम्मीद है।

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