फर्रुखाबाद। जिले की प्रमुख सातनपुर आलू मंडी में इस समय आलू की आवक आधी रह गई है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में भाव बढ़ने के बजाय गिरावट दर्ज की जा रही है। लगातार घटते दामों और पिछले वर्ष की भारी मंदी के अनुभव के चलते किसान इस बार आलू को शीतगृह में भंडारित करने से बच रहे हैं। ऐसे में शीतगृह संचालकों को अपने कोल्ड स्टोर भरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और किसानों को आकर्षित करने के लिए उन्हें विभिन्न तरह के प्रोत्साहन देने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार फरवरी माह में जब आलू भंडारण सत्र शुरू हुआ था, उस समय अच्छे आलू का भाव करीब 645 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। किसानों और व्यापारियों को उम्मीद थी कि आगे चलकर भाव में और तेजी आएगी, लेकिन मार्च आते-आते आलू के दामों में गिरावट शुरू हो गई। वर्तमान में आलू का भाव करीब 20 से 50 रुपये प्रति क्विंटल तक टूट चुका है, जिससे किसानों में निराशा बढ़ गई है।
जिले में आलू भंडारण के लिए पिछले वर्ष तक 109 शीतगृह संचालित हो रहे थे, जिनकी संख्या इस वर्ष बढ़कर 111 हो गई है। इसके बावजूद स्थिति यह है कि अभी तक अधिकांश शीतगृह अपनी कुल क्षमता का 50 प्रतिशत भी नहीं भर पाए हैं। भंडारण की धीमी रफ्तार से शीतगृह संचालक भी चिंतित हैं, क्योंकि समय पर कोल्ड स्टोर न भरने से उनके संचालन पर भी असर पड़ सकता है।
इसी स्थिति को देखते हुए कई शीतगृह संचालकों ने किसानों और व्यापारियों को भंडारण के लिए प्रोत्साहित करने की नई रणनीति अपनाई है। कुछ कोल्ड स्टोर किसानों को प्रति पैकेट लगभग 100 रुपये तक का ऋण दे रहे हैं और साथ ही बारदाना भी उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि किसान आसानी से आलू को पैक कर भंडारित कर सकें।
दरअसल, पिछले वर्ष आलू के बाजार में भारी मंदी आई थी, जिसके कारण कई किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। हालात इतने खराब हो गए थे कि कुछ किसानों ने अपना आलू शीतगृह में ही मुफ्त में छोड़ दिया था, क्योंकि बाजार में उसका मूल्य भंडारण और निकासी के खर्च से भी कम हो गया था। इसी अनुभव के कारण इस बार किसान काफी सतर्क हैं और बड़ी मात्रा में आलू को शीतगृह में रखने से बच रहे हैं।
स्थिति यह है कि कई किसान अपने खेतों के पास छायादार पेड़ों के नीचे ही आलू के ढेर लगाकर उसे सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं जिन शीतगृहों की बाजार में अच्छी साख है और जहां किसानों को भुगतान व सुविधाओं को लेकर भरोसा है, उन्हीं कोल्ड स्टोर में किसान सीमित मात्रा में आलू भंडारित करने पहुंच रहे हैं।
कृषि और मंडी से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि बाजार में आलू के दामों में जल्द सुधार नहीं हुआ तो किसानों और शीतगृह संचालकों दोनों के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। वहीं किसान भी इस समय बाजार की स्थिति को देखते हुए सोच-समझकर ही आलू भंडारण का निर्णय ले रहे हैं।
आवक घटने के बावजूद आलू के दाम गिरे, किसानों को लुभाने के लिए शीतगृह दे रहे ऋण और बारदाना


