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Friday, March 6, 2026

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के इस्तीफे पर सियासत तेज

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-ममता बनर्जी ने अमित शाह पर लगाया दबाव का आरोप

पश्चिम बंगाल| आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दबाव में लिया गया हो सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह के फैसले राजनीतिक दृष्टि से ही लिए जाते हैं।

ममता बनर्जी ने कहा कि बोस ने इस्तीफा क्यों दिया, इसे लेकर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि इस बदलाव के पीछे राजनीतिक गणित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह का कदम उठाया जाना राज्य की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश भी हो सकती है।

जानकारी के अनुसार, सीवी आनंद बोस का कार्यकाल नवंबर 2027 तक था, लेकिन उन्होंने तय समय से करीब 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। दिल्ली से उन्होंने पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और करीब साढ़े तीन साल तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहने के बाद उन्हें लगता है कि यह समय पर्याप्त है। हालांकि उन्होंने अपने अचानक इस्तीफे के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं किया।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें जानकारी दी है कि बोस के जाने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बारे में उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया, जो सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है।

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस घटनाक्रम से स्तब्ध और चिंतित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के एकतरफा फैसले देश के लोकतांत्रिक ढांचे और राज्यों की गरिमा को नुकसान पहुंचाते हैं। उनके अनुसार, केंद्र सरकार को राज्यों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए और इस तरह के फैसलों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

वहीं भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि राजभवन में बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया है और बोस ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है, जबकि चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी आम बात है।

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