– सरकार के सिस्टम को जन जन पहुंचाने की क़वायद हुईं तेज
– डीएम – एसपी की जुगलबंदी से दरकते सिस्टम में मची खलबली
– ध्वस्त हो चुके गोवंश आश्रय स्थलों को फिर सजाने का हो रहा खाका तैयार
फर्रुखाबाद। जनपद मे अब तक प्रशासनिक सुस्ती, अधूरे प्रोजेक्ट और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अब एक नई तस्वीर उभरती दिख रही है। नवागत जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के जिले की कमान संभालते ही स्पष्ट दिखने लगा है “काम नहीं तो कार्रवाई तय।” यही कारण है कि वर्षों से फाइलों में अटकी योजनाएं अब धरातल पर उतरती नजर आनें की उम्मीदें नजर आने लगीं हैं और अफसरशाही में हड़कंप मचा हुआ है।
जिले से गुजर रहे लिंक गंगा एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट पर डीएम ने सबसे पहले सख्ती दिखाई है। जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों पर अब रोजाना मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है। राजस्व, पुलिस और निर्माण एजेंसियों को एक साथ बैठाकर स्पष्ट टाइमलाइन तय की गई है। कई गांवों में प्रशासनिक तंत्र द्वारा पहुंचकर किसानों से संवाद किया जाने लगा है , जिससे प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है। सूत्रों के मुताबिक, लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए विशेष टीमें बनाई जा रहीं हैं और देरी करने वाले अधिकारियों को सीधे चेतावनी दी जा रही है ।
आलू बेल्ट के नाम से पहचान रखने वाले फर्रुखाबाद में किसानों की समस्या को भी डीएम ने केंद्र में रखा है। कोल्ड स्टोरेज और मंडियों का औचक निरीक्षण कर स्टॉक और रेट की हकीकत जानी जा रही है । बताया जा रहा है कि फूड प्रोसेसिंग यूनिट लाने के लिए निवेशकों से बातचीत तेज कर दी गई है, ताकि किसान सिर्फ कच्चा माल बेचने तक सीमित न रहें बल्कि उन्हें बेहतर दाम और स्थायी बाजार मिल सके। बिचौलियों की भूमिका कम करने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी भी चल रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी प्रशासनिक सख्ती साफ नजर आ रही है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में औचक निरीक्षण कर डॉक्टरों और स्टाफ की उपस्थिति जाँचने का खाका तैयार किया गया है । कई जगह लापरवाही मिलने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। दवाओं की उपलब्धता, उपकरणों के उपयोग और मरीजों की सुविधा को लेकर सीधे निर्देश दिए गए हैं। संकेत साफ हैं अब अस्पतालों में सिर्फ बिल्डिंग नहीं, सेवा भी दिखनी चाहिए। लंबे समय से जनपद में पूरी तरह ध्वस्त हो चुके गोवंश आश्रय केंद्रों को प्रमुखता से फिर से पौराणिक महत्व के साथ सजाने की इच्छा शक्ति फिर दिखने लगी है।
सड़क और नगर विकास के मोर्चे पर भी डीएम ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। खराब सड़कों, जलभराव और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर पीडब्ल्यूडी और नगर निकायों की जवाबदेही तय की जा रही है। कई क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पर तत्काल एक्शन प्लान तैयार कराया गया है। जिन सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठे, उनकी जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषी पाए जाने पर ठेकेदारों पर कार्रवाई की तैयारी है।
रोजगार और निवेश के मुद्दे पर भी प्रशासन सक्रिय हो गया है। जिला स्तर पर निवेशकों की बैठकें कर उद्योग स्थापित करने का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। युवाओं के पलायन को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर फोकस किया जा रहा है। कौशल विकास योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्रुखाबाद में प्रशासनिक गलियारों में अब एक ही चर्चा है डीएम की सख्ती और काम करने का तरीका। जहां एक ओर आम जनता को राहत की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों में डर साफ दिखाई दे रहा है।अब नजर इस बात पर है कि डॉ. अंकुर लाठर की यह तेज रफ्तार कार्रवाई लंबे समय तक कायम रहती है या फिर सिस्टम की पुरानी सुस्ती इसे धीमा कर देती है। फिलहाल फर्रुखाबाद में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह “एक्शन मोड” में नजर आ रही है। नवागत डीएम के सख्त रुख और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की बेहतर जुगलबंदी के चलते माफिया तंत्र की चूरें हिलती नजर आ रही हैं।


