आशित
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, यह ऊर्जा, उत्साह और सामाजिक जुड़ाव का पर्व है। लेकिन बदलते समय के साथ इसकी तस्वीर भी बदली है। आज की युवा पीढ़ी होली को केवल पारंपरिक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि अपनी सोच, अपनी पहचान और अपनी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में देख रही है।
पहले होली मोहल्लों, गलियों और गांवों तक सीमित रहती थी। ढोलक की थाप, फाग के गीत और घर-घर जाकर रंग लगाने की परंपरा इसकी पहचान थी। आज भी यह परंपरा कायम है, लेकिन इसके साथ जुड़ गया है डिजिटल दौर। इंस्टाग्राम रील्स, ग्रुप सेल्फी, लाइव वीडियो और होली थीम फोटोशूट अब उत्सव का हिस्सा बन चुके हैं। युवा अपने रंगों को दुनिया के साथ साझा करना चाहते हैं।
हालांकि इस डिजिटल चमक के बीच एक सकारात्मक बदलाव भी दिखाई देता है। युवा अब पर्यावरण के प्रति जागरूक हो रहे हैं। केमिकल रंगों की जगह ऑर्गेनिक गुलाल, पानी की बर्बादी से बचाव और ड्राई होली जैसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं। कई कॉलेजों और सामाजिक संगठनों ने “सेफ होली” और “ग्रीन होली” अभियान शुरू किए हैं।
होली आज के युवाओं के लिए रिश्तों को रीसेट करने का दिन भी है। साल भर की गलतफहमियों को भुलाकर गले मिलना, माफी मांगना और नई शुरुआत करना—यही इस पर्व की आत्मा है। मानसिक तनाव, पढ़ाई और करियर की प्रतिस्पर्धा के बीच यह त्योहार युवाओं को खुलकर जीने का मौका देता है।
लेकिन चुनौतियां भी हैं। “बुरा न मानो होली है” जैसी सोच कई बार सीमाएं लांघ देती है। छेड़छाड़, जबरदस्ती रंग लगाने या नशे में दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं त्योहार की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इन गलत परंपराओं को खत्म करे और सम्मानजनक उत्सव की संस्कृति विकसित करे।
आर्थिक दृष्टि से भी होली युवाओं के लिए अवसर बन रही है। ऑर्गेनिक रंगों का स्टार्टअप, इवेंट मैनेजमेंट, थीम पार्टी और डिजिटल प्रमोशन जैसे नए क्षेत्र युवाओं को रोजगार दे रहे हैं। त्योहार अब केवल खर्च का नहीं, कमाई का माध्यम भी बन रहा है।
गांव की होली और शहर की होली में फर्क जरूर है, लेकिन भावना एक ही है—मिलन और मस्ती। ग्रामीण युवाओं के लिए यह सामूहिकता का प्रतीक है, जबकि शहरी युवाओं के लिए यह अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का मंच बन गया है।
अंततः होली का असली अर्थ रंगों से आगे है। यह प्रेम, विश्वास और नई शुरुआत का संदेश देती है। यदि युवा जिम्मेदारी, जागरूकता और सकारात्मक सोच के साथ इसे मनाएं, तो यह त्योहार समाज में नई ऊर्जा और एकता का संचार कर सकता है।
नई पीढ़ी की होली केवल रंगों की नहीं, बल्कि विचारों की होली है—जहां जोश भी है और जागरूकता भी। यही संतुलन भविष्य की सबसे बड़ी ताकत
नई पीढ़ी की होली: रंगों में जोश, सोच में बदलाव


