शिवम् कटियार
आज के समय में युवाओं के बीच यह धारणा तेजी से फैलती है कि “वीर्य ही असली शक्ति है” और उसके निकलने से शरीर कमजोर हो जाता है। सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी के कारण कई युवा डर, अपराधबोध और भ्रम का शिकार हो जाते हैं। इस विषय को भावनाओं से नहीं, बल्कि विज्ञान की रोशनी में समझने की जरूरत है।
चिकित्सकीय विज्ञान के अनुसार वीर्य एक जैविक द्रव है, जिसमें शुक्राणु, प्रोटीन, एंज़ाइम और कुछ खनिज तत्व होते हैं। शरीर में शुक्राणु निर्माण की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और स्वस्थ पुरुष शरीर रोज़ लाखों शुक्राणु बनाता है। यानी यह कोई सीमित भंडार नहीं है जो एक बार समाप्त हो जाए तो शरीर कमजोर पड़ जाए। सामान्य स्खलन से निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा बहुत कम होती है और शरीर उसे आसानी से पुनः बना लेता है।
यह सच है कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी आदत में अति कर दे—चाहे वह हस्तमैथुन हो या कोई और व्यवहार—तो मानसिक थकान, ध्यान में कमी और अपराधबोध जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। लेकिन यह कमजोरी वीर्य की “शक्ति खत्म” होने से नहीं, बल्कि असंतुलित जीवनशैली और मनोवैज्ञानिक दबाव से जुड़ी होती है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि संतुलित और सामान्य यौन व्यवहार से स्थायी शारीरिक कमजोरी नहीं आती।
युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक शक्ति शरीर के एक द्रव में नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली में होती है। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, सकारात्मक सोच और लक्ष्य पर फोकस—ये सभी मिलकर ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। प्रोटीन, फल, हरी सब्जियाँ और पर्याप्त पानी शरीर की वास्तविक ताकत का आधार हैं। रोज़ाना व्यायाम करने से हार्मोन संतुलित रहते हैं और मानसिक मजबूती भी बढ़ती है।
डिजिटल दौर में अश्लील सामग्री की लत से बचना भी जरूरी है, क्योंकि यह मानसिक असंतुलन और अवास्तविक अपेक्षाएँ पैदा कर सकती है। यदि किसी युवक को अत्यधिक थकान, कमजोरी या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी कोई असामान्य समस्या महसूस हो, तो उसे डरने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
अंततः यह समझना आवश्यक है कि वीर्य को लेकर फैले कई दावे वैज्ञानिक आधार पर सही नहीं हैं। संयम का अर्थ दमन नहीं, बल्कि संतुलन है। युवा अगर अपने शरीर को समझकर, सही जानकारी के साथ आगे बढ़ें, तो वे भ्रम से मुक्त होकर स्वस्थ और आत्मविश्वासी जीवन जी सकते हैं।


