फर्रुखाबाद: कायमगंज की प्रमुख सामाजिक संस्था राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम के तत्वावधान में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद (Amar Shaheed Chandrashekhar Azad) के बलिदान दिवस (Martyrdom Day) पर कृष्णा प्रेस परिसर सदवाड़ा में गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि न फांसी न जेल। आजाद हैं आजाद ही रहेंगे की पैज करके चंद्रशेखर आजाद अभिमन्यु की तरह अकेले आखिरी दम तक शत्रुओं से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। बलिदानी क्रांतिकारी किताबों में नहीं बल्कि राष्ट्र प्रेमियों के दिल में रहते हैं वे सत्य ही अमृत पुत्र होते हैं।
गीतकार पवन बाथम ने कहा कि देश को आजादी अहिंसा और प्रदर्शन से नहीं बल्कि युवकों के खून से नहा कर देश आजाद हुआ। क्रांतिकारियों के स्मरण मात्र से आज भी युवकों में बिजली सी दौड़ जाती है। प्रोफेसर कुलदीप आर्य ने कहा कि सनातन वैदिक दर्शन महान उद्देश्य के लिए प्राण उत्सर्ग करने की प्रेरणा देता है। पूर्व प्रधानाचार्य अहिबरन सिंह गौर ने कहा कि इतिहासकारों ने भारतीय क्रांति के इतिहास पर पर्दा डालने का अपराध किया। वर्तमान सरकार ने इस गलती को सुधार करने के प्रयास किए हैं।
आचार्य शिवकांत शुक्ला ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किए कि महाराणा प्रताप गुरु गोविंद सिंह शिवाजी बिरसा मुंडा रानी लक्ष्मीबाई चंद्रशेखर आजाद सरदार भगत सिंह जैसे महावीरों के आदर्श चरित्र पाठ्य क्रर्मों में शामिल करने से राष्ट्रीय चेतना जगेगी। भारत अजय होगा। डॉ सुनीत सिद्धार्थ ने कहा कि शीश रख कर के हथेली पर दीवाने चल दिए। नीव के पत्थर हुए आजाद भारत के लिए।। वीएस तिवारी एवं जे पी दुबे ने आजाद के बलिदान की रोमांचक घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण विश्व इतिहास में कहीं भी नहीं मिलेंगे।
अनुपम मिश्रा ने कहा… ये
तुमको शिक्षा से मिला आलस और प्रमाद। तुम क्या जानो किस तरह देश हुआ आजाद।।छात्र यशवर्धन ने भी काव्यपाठ किया । संयोजक वरिष्ठ कवि पवन बाथम ने शाहिद को काव्यांजलि अर्पित की।


