लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर सामाजिक न्याय की राजनीति को केंद्र में रखते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे पीड़ा बढ़ रही है, पीडीए बढ़ता चला जा रहा है।”
यह बयान केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि प्रदेश की बदलती सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों की ओर इशारा करता है। पीडीए —यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—को समाजवादी पार्टी एक व्यापक सामाजिक गठबंधन के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों की समस्याएँ, युवाओं में निराशा और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि जब समाज का बड़ा वर्ग खुद को उपेक्षित और दबाव में महसूस करता है, तो वह एकजुट होकर अपनी राजनीतिक आवाज़ मजबूत करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में आर्थिक और सामाजिक असंतुलन बढ़ा है, जिसका असर सबसे अधिक वंचित वर्गों पर पड़ रहा है। ऐसे में पीडीए की अवधारणा केवल चुनावी समीकरण नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की आवश्यकता बनती जा रही है।
पीडीए की रणनीति और राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, समाजवादी पार्टी पीडीए के जरिए एक व्यापक सामाजिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रही है। यह रणनीति 2024 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अखिलेश यादव का यह भी कहना है कि जब जनता की समस्याएँ बढ़ती हैं, तो वह सत्ता परिवर्तन की दिशा में सोचती है। पीडीए उसी सोच का संगठित स्वरूप है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
वहीं, विपक्षी दल इस बयान को राजनीतिक ध्रुवीकरण की रणनीति बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल चुनावी समीकरण साधने का प्रयास है।
लेकिन समाजवादी पार्टी का दावा है कि पीडीए किसी जातीय या धार्मिक विभाजन की राजनीति नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक समानता की लड़ाई है।
अखिलेश यादव का यह बयान प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।
एक ओर बढ़ती आर्थिक और सामाजिक चुनौतियाँ हैं, दूसरी ओर राजनीतिक दलों की नई रणनीतियाँ।
आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि पीडीए का यह सामाजिक समीकरण चुनावी राजनीति में कितना प्रभावी साबित होता है। फिलहाल इतना तय है कि “पीड़ा” और “राजनीति” के बीच का संबंध प्रदेश की सियासत को नई दिशा दे रहा है।
“जैसे-जैसे पीड़ा बढ़ रही है, पीडीए बढ़ता चला जा रहा है।” – अखिलेश यादव


