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Tuesday, February 24, 2026

कांग्रेस का केंद्र पर हमला: फिलिस्तीनियों को छोड़ दिया, मोदी के इस्राइल दौरे पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित इस्राइल दौरे से ठीक पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपनी ऐतिहासिक प्रतिबद्धता से पीछे हटते हुए फिलिस्तीनियों को “बेसहारा” छोड़ दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार के रुख को “दिखावटी और पाखंडपूर्ण” बताया।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि गाजा में नागरिकों पर इस्राइली हमले जारी हैं और वेस्ट बैंक में हजारों फिलिस्तीनियों को बेदखल एवं विस्थापित किए जाने की कार्रवाई तेज हो गई है, जिसकी वैश्विक स्तर पर निंदा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्राइल और अमेरिका ईरान पर हवाई हमलों की योजना बना रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में प्रधानमंत्री मोदी का इस्राइल दौरा कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा, “इसके बावजूद प्रधानमंत्री इस्राइल जा रहे हैं और अपने मित्र प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे, जिन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।” रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू इस्राइल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
कांग्रेस ने याद दिलाया कि भारत उन शुरुआती देशों में शामिल रहा है, जिसने 18 नवंबर 1988 को फिलिस्तीन को आधिकारिक मान्यता दी थी। पार्टी का कहना है कि भारत की विदेश नीति लंबे समय तक फिलिस्तीन के समर्थन और पश्चिम एशिया में संतुलित रुख पर आधारित रही है, लेकिन वर्तमान सरकार इस परंपरा से विचलित हो गई है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी 25 फरवरी को दो दिवसीय यात्रा पर इस्राइल पहुंचेंगे। इस दौरान वे इस्राइली संसद ‘नेसट’ को संबोधित करेंगे तथा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्राइल की आंतरिक राजनीति में भी यह दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि यदि प्रोटोकॉल के तहत सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख को आमंत्रित नहीं किया गया, तो वे भारतीय प्रधानमंत्री के संसद संबोधन का बहिष्कार कर सकते हैं।
भाजपा या केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कांग्रेस के आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा विदेश नीति और मानवीय सरोकारों के संदर्भ में नई बहस को जन्म दे रहा है।

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