ट्विटर पर चार घंटे रहा प्रथम स्थान पर ट्रेंड, तीन दिवसीय काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
शाहजहांपुर। परिषदीय विद्यालयों में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने हेतु टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किए जाने के विरोध में शिक्षकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रविवार को शिक्षकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Twitter (X) पर आक्रोश व्यक्त करते हुए जस्टिस फॉर टीचर हैंस टैंग अभियान चलाया, जो लगातार चार घंटे तक प्रथम स्थान पर ट्रेंड करता रहा। सोमवार से आंदोलन के द्वितीय चरण में शिक्षकों ने तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत विद्यालयों, बीएलओ बूथों और बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी के दौरान हाथ पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी ने बताया कि प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठन टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त वे शिक्षक, जिन्होंने नियुक्ति के समय सभी निर्धारित योग्यताएं पूर्ण कर चयन पाया और जो लगभग तीन दशकों से सेवा दे रहे हैं तथा सेवानिवृत्ति के निकट हैं, उनसे अब टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता थोपना न केवल अनियमित बल्कि उत्पीड़नात्मक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक माननीय न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन वर्ष 2017 में सरकार द्वारा किए गए संशोधन का विरोध करते हैं, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। शिक्षकों की मांग है कि उक्त संशोधन निरस्त किया जाए तथा टीईटी की अनिवार्यता केवल वर्ष 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर ही लागू की जाए। घोषित कार्यक्रम के अनुसार 25 फरवरी तक शिक्षक अपने-अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। 26 फरवरी को जनपद के सभी शिक्षक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर एकत्र होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च करेंगे और प्रधानमंत्री को संबोधित मांग पत्र प्रेषित करेंगे।
सोमवार के विरोध प्रदर्शन में प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री संजय सिंह, जिला अध्यक्ष मुनीश मिश्र, जिला मंत्री देवेश बाजपेई, जिला कोषाध्यक्ष रविन्द्र पाल प्रजापति, जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार तिवारी, डॉ. विनय गुप्ता, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष मंगरे लाल, जिला मंत्री विश्राम सिंह, बृजेश कुमार वर्मा तथा महिला शिक्षक संघ के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल रहीं।


