लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने महिला आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जोरदार निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए दोनों ही दलों ने अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के हितों की अनदेखी की, जबकि अब राजनीतिक स्वार्थ के तहत इन वर्गों की महिलाओं की बात की जा रही है।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने शासनकाल में एससी-एसटी और ओबीसी वर्गों के संवैधानिक अधिकारों को पूरी तरह लागू करने की कोई गंभीर पहल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मंडल आयोग की सिफारिशों के अनुसार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को भी प्रभावी रूप से लागू नहीं किया, जिसे बाद में अन्य प्रयासों से लागू किया गया।
इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि सपा सरकार ने पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने से संबंधित पिछड़ा वर्ग आयोग की 1994 की रिपोर्ट को लागू नहीं किया और उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। मायावती के अनुसार, बसपा सरकार बनने के बाद ही इस दिशा में कदम उठाए गए।
उन्होंने यह भी कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों ही दल सत्ता में रहने और विपक्ष में रहने के दौरान अलग-अलग रवैया अपनाते हैं। सत्ता में रहते हुए इनका रुख संकीर्ण और तिरस्कारपूर्ण होता है, जबकि विपक्ष में रहते हुए ये सामाजिक न्याय और आरक्षण की बात करते हैं। उन्होंने इसे “दोहरे चरित्र” की राजनीति बताया।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि यदि इसे जल्द लागू करना है तो पिछली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि यदि वर्तमान में कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी भाजपा सरकार की तरह ही यही कदम उठाती।
अंत में मायावती ने एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज से अपील की कि वे किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में न आएं और अपने हितों के प्रति स्वयं जागरूक बनें। उन्होंने कहा कि समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना ही स्थायी समाधान है, तभी इन वर्गों का वास्तविक विकास संभव हो पाएगा।
महिला आरक्षण,एससी, एसटी और ओबीसी हितों में कांग्रेस – सपा का रहा दोहरा रवैया : मायावती


