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Thursday, February 26, 2026

कन्नौज में अजीबोगरीब मामला! डॉक्टरों ने जिस व्यक्ति को किया मृत घोषित, फ्रीजर में रखते ही उसकी चलने लगी सांसे

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कन्नौज: उत्तर प्रदेश के कन्नौज (Kannauj) जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने चिकित्सा प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कानपुर (Kanpur) के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों (doctors) द्वारा मृत घोषित किए गए एक व्यक्ति को बाद में उसके घर पर जीवित पाया गया। यह घटना गुरुसहायगंज कस्बे में घटी, जहां तिरवा रोड पर रहने वाला दुकानदार पीड़ित 31 दिसंबर की शाम को अपने घर के बाहर अलाव के पास बैठा था, तभी उसकी तबीयत खराब हो गई। गंभीर हालत की आशंका से परिवार उसे तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले गया, जहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे कानपुर रेफर कर दिया गया। उसे कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया।

परिवार का आरोप है कि 2 जनवरी को शाम करीब 6 बजे कानपुर के अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और शव ले जाने को कहा। उसकी मृत्यु की खबर घर पहुंचते ही परिवार सदमे में आ गया। रोते-बिलखते वे शव को गुरुसहाय गंज वापस ले आए। चूंकि रात काफी हो चुकी थी और अंतिम संस्कार अगली सुबह होना था, इसलिए परिवार ने शव को सुरक्षित रखने के लिए नगर निगम से एक डीप फ्रीजर की व्यवस्था की।

रिश्तेदार और पड़ोसी घर पर जमा थे, तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। लगभग आधे घंटे बाद, परिवार वालों ने उस आदमी के हाथों और पैरों में हल्की हलचल देखी। पहले तो उन्हें लगा कि यह सिर्फ भ्रम है, लेकिन जल्द ही हलचल बढ़ गई और सांस लेने के स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगे।

परिवार को जब पता चला कि वह आदमी जीवित है, तो दहशत और सदमे में डूब गए। जांच करने पर उनका शरीर गर्म था और नब्ज़ चल रही थी। बिना समय बर्बाद किए, परिवार वाले उन्हें तुरंत कानपुर के अस्पताल ले गए, जहां उन्हें इलाज के लिए दोबारा भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने पुष्टि की कि वह जीवित हैं। उनकी हालत फिलहाल गंभीर लेकिन स्थिर है और उनका इलाज चल रहा है।

इस घटना ने न केवल लोगों की ईश्वर में आस्था को मजबूत किया है, बल्कि कानपुर के उस अस्पताल के खिलाफ भी आक्रोश पैदा किया है, जिस पर उचित जांच किए बिना मरीज को मृत घोषित करने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर फ्रीजर की व्यवस्था तुरंत न की गई होती या और देरी हुई होती, तो जीवित व्यक्ति का अंतिम संस्कार हो सकता था। पूरा इलाका अब उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है, वहीं चिकित्सा जिम्मेदारी और लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।

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