फर्रुखाबाद । रेलवे रोड पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां केंद्र सरकार के उपक्रम बीएसएनएल के लगभग आधा सैकड़ा टेलीफोन पोल रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े स्तर पर पोल हटाए जाने के बावजूद बीएसएनएल लंबे समय तक इस पूरे घटनाक्रम से अनजान बना रहा।
रेलवे रोड चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के चलते सड़क किनारे लगे विद्युत पोलों को हटाने का कार्य बिजली विभाग द्वारा किया जा रहा था। इसी बीच बीएसएनएल के टेलीफोन पोल भी हटते चले गए, लेकिन इसकी जानकारी संबंधित विभाग को समय रहते नहीं हो सकी। जब बीएसएनएल के अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया, तो मौके पर केवल 7 पोल ही मौजूद मिले, जबकि शेष सभी पोल गायब पाए गए।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब बिजली विभाग द्वारा पोल हटाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में विद्युत पोलों के साथ-साथ बीएसएनएल के पोल भी लादे जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर सवालों की झड़ी लग गई है।
बीएसएनएल के पोल हटाए जाने को लेकर फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल ने कड़ा रुख अपनाया। जिलाध्यक्ष मनोज मिश्रा के नेतृत्व में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने बीएसएनएल के डीजीएम राम शरण को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
बीएसएनएल अधिकारियों के अनुसार रेलवे रोड पर लगे ये पोल वर्ष 1980 के आसपास स्थापित किए गए थे। ये पोल जीआई (जस्ती लोहे) से बने होते हैं, जिनमें जंग नहीं लगती और इनकी कीमत सामान्य लोहे के पोल की तुलना में काफी अधिक होती है। ऐसे में इतने कीमती पोलों का इस तरह गायब होना गंभीर लापरवाही और संभावित अनियमितता की ओर इशारा करता है।
बीएसएनएल के डीजीएम राम शरण ने बताया कि विभाग द्वारा विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि किन-किन स्थानों से बीएसएनएल के पोल बिना अनुमति के हटाए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
घटना सामने आने के बाद बीएसएनएल और संबंधित विभागों में हड़कंप मचा हुआ है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर इतने वर्षों से लगे बीएसएनएल के पोल किसकी लापरवाही या मिलीभगत से गायब हुए।


