पटना। बिहार में आस्था के सबसे बड़े पर्व छठ पूजा की खुशियां इस बार दर्द में बदल गईं। पूरे राज्य से डूबने की भयावह घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई है। अब तक विभिन्न जिलों में डूबने से 89 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (SDRF) और एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।इन घटनाओं के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और अधिकारियों को त्वरित राहत राशि देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि छठ जैसे बड़े धार्मिक पर्व पर ऐसी घटनाएं बेहद दुखद हैं और सरकार इनकी पूरी जांच करवाएगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न दोहराई जाए।राज्य आपदा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक मौतें उत्तर बिहार के जिलों से हुई हैं। पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, भागलपुर, नवगछिया, सहरसा, सुपौल, सीतामढ़ी, गोपालगंज और बेगूसराय में कई जगह हादसे दर्ज हुए हैं। अकेले नवगछिया पुलिस जिला के नवटोलिया गांव में सोमवार को चार बच्चों की डूबने से मौत हो गई, जबकि दो बच्चे अब भी लापता हैं। हादसा गंगा की उपधारा में स्नान के दौरान हुआ, जब बच्चे तेज धारा में बह गए।राज्यभर में सोमवार को 35 और मंगलवार को 53 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। प्रशासन का कहना है कि कई लोगों ने अनधिकृत घाटों पर पूजा-अर्चना की, जहां न तो गोताखोर तैनात थे और न ही सुरक्षा प्रबंध। कई स्थानों पर गहराई या पानी के तेज बहाव की जानकारी देने वाले बोर्ड भी नहीं लगे थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई घाटों पर रात के समय बिजली व्यवस्था न होने से श्रद्धालुओं को सही दिशा का अंदाजा नहीं हो सका, जिससे हादसे बढ़े।सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे छठ घाटों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करें और पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट गृह विभाग को भेजें। आपदा विभाग ने कहा है कि SDRF की टीमें सभी प्रमुख घाटों पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। अब तक 40 से अधिक शवों की पहचान कर ली गई है, जबकि बाकी की तलाश जारी है।
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रूपये की अनुग्रह सहायता राशि देने का ऐलान किया है। वहीं विपक्ष ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि हर साल छठ पूजा के दौरान प्रशासनिक तैयारियों की बातें तो होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत रहती है।
फिलहाल राज्य में 24 घंटे का हाई अलर्ट जारी किया गया है और नदी घाटों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस, गोताखोर और आपदा राहत दल लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। राज्य सरकार ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में छठ पर्व से पहले सभी जिलों में सुरक्षा की मानक प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाएगा।






