कार्यकर्ता मुख्य गेट पर एकत्र हुईं। इसके बाद सभी सीएचसी परिसर में स्थित कोल्ड चेन कक्ष के पास पहुंचीं। यहां उन्होंने कक्ष में ताला लगाकर बाहर दरी बिछाई और नारेबाजी करते हुए धरना प्रदर्शन किया।
आशा कार्यकर्ताओं की मांग है कि वर्तमान में मिल रहे 2,000 रुपये के मानदेय को बढ़ाकर 21,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। उनका कहना है कि गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करने पड़ते हैं। इनमें आभा आईडी बनाना, कुष्ठ रोग का सर्वे, मरीजों की पहचान, स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा गर्भवती महिलाओं और बच्चों से संबंधित जानकारी जुटाना शामिल है। इसके अलावा विभिन्न विभागीय सर्वे और फॉलोअप की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है।
आशाओं का कहना है कि काम और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन मानदेय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसी को लेकर वे लगातार धरना प्रदर्शन कर रही हैं। दसवें दिन भी आशा कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
ये आशा कार्यकर्ता रहीं मौजूद: सुनीता यादव, सरस्वती, विनीता, किरण, साधना, सुलेखा, स्नेहलता, रेखा, शीलू, शशि, सिमरन, सरोज, मीरा, सविता, उषा, अनीता, ज्योति, सुधा, रश्मि, रामवती, कुसुमा देवी, सुनीता देवी, रामा देवी, माधुरी और अन्य आशा कार्यकर्ता व संगिनियां मौजूद रहीं।
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।


