जिले की कई सहकारी समितियों में डीएपी का स्टॉक खत्म, एनपीके के भरोसे किसान; अधिकारियों को एक सप्ताह में खाद की रैक आने की उम्मीद
फर्रुखाबाद। आलू और सरसों की बोआई की तैयारी में जुटे किसानों के सामने डीएपी खाद की कमी बड़ी समस्या बनकर उभरी है। जिले में आलू की बोआई शुरू हो चुकी है और अगेती सरसों की फसल की बुवाई भी की जा रही है। ऐसे में किसान समय पर खाद पाने के लिए सहकारी समितियों और इफको केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कई स्थानों पर डीएपी का स्टॉक खत्म होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। खाद की किल्लत से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जिले में कुल 70 सहकारी समितियां हैं, जहां बड़ी संख्या में किसान सदस्य हैं। फर्रुखाबाद में आलू की खेती प्रमुखता से की जाती है। बोआई के इस महत्वपूर्ण समय में डीएपी की उपलब्धता कम होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई समितियों पर एनपीके और यूरिया उपलब्ध हैं, लेकिन किसानों की जरूरत के अनुसार डीएपी नहीं मिल पा रही है।
शहर की सातनपुर मंडी स्थित आलू किसान सहकारी संघ में डीएपी का स्टॉक बुधवार को ही समाप्त हो गया था। यहां सचिव मुकेश कुमार और सभापति विमल कटियार मौजूद थे। डीएपी खत्म होने के बाद किसानों को खाद मिलने की उम्मीद में केंद्र पहुंचने पर निराशा हाथ लगी। कुछ एनपीके की बोरियां वितरित किए जाने के बाद उसका स्टॉक भी समाप्त हो गया।
केंद्र पर दोपहर के समय खाद लेने पहुंचे किसानों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। संघ के सचिव ने बताया कि डीएपी की नई खेप आने के बाद ही वितरण शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने दो से चार दिन में खाद आने की संभावना जताई।
खाद की कमी का असर इफको केंद्र पर भी दिखाई दिया। यहां डीएपी के साथ एनपीके भी उपलब्ध नहीं थी। खाद लेने पहुंचे किसानों को केंद्र प्रभारी धीरज कुशवाहा ने बताया कि एनपीके की आपूर्ति शनिवार को होने की उम्मीद है, जबकि डीएपी आने में अभी कुछ समय लग सकता है।
बोआई के समय खाद के लिए परेशान किसानों को इससे निराशा हुई। किसानों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि समय पर खाद नहीं मिली तो उन्हें अपनी फसल की बोआई की तैयारी में परेशानी हो सकती
मोहम्मदाबाद सहकारी समिति में 177 बोरी यूरिया और 225 बोरी एनपीके उपलब्ध होने की जानकारी दी गई, लेकिन यहां डीएपी का स्टॉक खत्म है। बराकेशव गांव निवासी किसान अरविंद ने बताया कि उन्हें आलू की बोआई के लिए 10 बोरी डीएपी की जरूरत है। वह करीब 12 दिन पहले भी समिति पर खाद लेने पहुंचे थे, लेकिन उस समय भी डीएपी नहीं मिल सकी थी। दोबारा आने पर भी उन्हें खाद उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई।
समिति के सचिव संदीप कुमार ने बताया कि डीएपी की मांग भेजी जा चुकी है। खाद उपलब्ध होते ही वितरण किया जाएगा।
इसी तरह खिमसेपुर सहकारी समिति के सचिव सुशील अवस्थी ने बताया कि समिति में पिछले चार दिनों से डीएपी उपलब्ध नहीं है। इसके लिए मांगपत्र भेजा जा चुका है। आपूर्ति मिलने के बाद किसानों को खाद वितरित की जाएगी।
नवाबगंज क्षेत्र की कनासी, मंझना, मई रसीदपुर और बबना सहकारी समितियों में भी डीएपी का स्टॉक खत्म हो चुका है। संबंधित समिति सचिवों के अनुसार खाद की मांग भेजी जा चुकी है। इन समितियों पर एनपीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
वहीं, शमसाबाद स्थित कृषक सेवा केंद्र के सचिव राजीव दुबे ने बताया कि केंद्र पर डीएपी उपलब्ध नहीं है, जबकि एनपीके की 800 बोरी रखी हुई हैं। उन्होंने 800 बोरी डीएपी के लिए मांगपत्र भेजा है और एक-दो दिन में आपूर्ति आने की उम्मीद जताई।
सहकारी समिति पपड़ी के सचिव रोहित कुमार ने भी डीएपी खत्म होने की पुष्टि की। उनके अनुसार मांगपत्र भेज दिया गया है और एनपीके उपलब्ध है। बुढ़नपुर सहकारी समिति के सचिव सत्येंद्र सिंह ने बताया कि समिति में डीएपी नहीं है, लेकिन एनपीके की 350 बोरी उपलब्ध हैं।
कंपिल सहकारी समिति के सचिव अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि उनकी समिति पर डीएपी उपलब्ध है। हालांकि, उपलब्ध खाद की कुल मात्रा स्पष्ट नहीं हो सकी।
जिले की सभी समितियों पर खाद की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ समितियों पर डीएपी का स्टॉक उपलब्ध होने के कारण किसानों को खाद वितरित की जा रही है।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र की हरकमपुर सहकारी समिति के कंप्यूटर ऑपरेटर विकल कुमार के अनुसार, समिति पर डीएपी की 360 बोरी, एनपीके की 78 बोरी, यूरिया की 860 बोरी और पोटाश की 130 बोरी उपलब्ध हैं।
समिति के सचिव बृजभान सिंह ने बताया कि उनके पास तीन समितियों का प्रभार है। हरकमपुर में सोमवार और मंगलवार, ज्योता में बुधवार और बृहस्पतिवार तथा सकवाई समिति में शुक्रवार और शनिवार को खाद का वितरण किया जाता है।
उनके अनुसार, सकवाई समिति में डीएपी की 780 बोरी और एनपीके की 100 बोरी उपलब्ध हैं। वहीं, ज्योता समिति में डीएपी की 200 बोरी, एनपीके की 100 बोरी और यूरिया की 740 बोरी होने की जानकारी दी गई।
इसके अलावा अमृतपुर और हुसैनपुर हड़ाई सहकारी समितियों में डीएपी की 400-400 बोरी उपलब्ध बताई गई। इन समितियों पर एनपीके की भी पर्याप्त उपलब्धता की जानकारी दी गई।
जहानगंज की सहकारी समिति में डीएपी की 65 बोरी और किसान सेवा सहकारी समिति में 80 बोरी उपलब्ध थीं। यहां खाद लेने के लिए किसानों की कतारें लगी हुई थीं।
जिले में डीएपी की आपूर्ति को लेकर सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बफर गोदाम में फिलहाल डीएपी का स्टॉक नहीं है। एआर कोऑपरेटिव अजय पालीवाल के अनुसार, डीएपी की रैक आने वाली है। जिन समितियों पर खाद उपलब्ध है, वहां वितरण किया जा रहा है। जिन समितियों में स्टॉक खत्म हो गया है, वहां नई खेप आने के बाद खाद भेजी जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि बफर गोदाम से समितियों के लिए 700 मीट्रिक टन डीएपी आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि एनपीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। पीपीएल, कृभको और इफको की डीएपी की रैक एक सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है। इसके बाद खाद की उपलब्धता में सुधार होने की संभावना है।
आलू और सरसों की बोआई के बीच डीएपी की कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। एक ओर कई समितियों पर खाद खत्म हो चुकी है, तो दूसरी ओर कुछ केंद्रों पर सीमित स्टॉक के कारण किसानों को कतारों में लगना पड़ रहा है। किसान चाहते हैं कि नई खेप जल्द पहुंचे, ताकि उन्हें समय पर खाद मिल सके और बोआई का काम प्रभावित न हो।
फिलहाल किसानों की निगाहें खाद की अगली रैक पर टिकी हैं। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर नई आपूर्ति आने की उम्मीद जताई है। अब देखना होगा कि नई खेप आने के बाद जिले की उन समितियों पर खाद कब तक पहुंचती है, जहां किसान कई दिनों से डीएपी के लिए इंतजार कर रहे हैं।


