एलडीए में रिकॉर्ड नहीं मिलने से उठे सवाल, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीन पर निर्माण की भी जांच
लखनऊ। गोलागंज के बारूदखाना स्थित छह मंजिला एसए अपार्टमेंट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इमारत के खतरनाक स्थिति में पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उसके निर्माण से जुड़ी एलडीए की मूल फाइल को लेकर खड़ा हो गया है। घटना सामने आने के चार दिन बाद भी एलडीए में अपार्टमेंट की फाइल नहीं मिल सकी है।
एसए अपार्टमेंट में पिलर क्षतिग्रस्त होने के बाद इमारत के गिरने का खतरा पैदा हुआ था। इसके बाद प्रशासन और एलडीए ने आसपास के लोगों को सुरक्षित कराया तथा भवन को तत्काल सहारा देने के लिए तकनीकी उपाय किए। अब एलडीए ने अपार्टमेंट को ध्वस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
एलडीए में फाइल उपलब्ध न होने के कारण यह स्पष्ट करने में परेशानी हो रही है कि अपार्टमेंट के निर्माण के लिए मूल रूप से कौन-सा मानचित्र स्वीकृत हुआ था और किस तरह की निर्माण अनुमति दी गई थी। एलडीए अधिकारियों के मुताबिक फाइल कई विभागों में जाने के कारण उसकी तलाश की जा रही है। साथ ही बिल्डर से भी संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, एलडीए के रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्ष 2009 में इस भूखंड पर एकल आवासीय भवन का मानचित्र स्वीकृत हुआ था, जिसमें बेसमेंट सहित तीन मंजिल तक निर्माण की अनुमति बताई गई थी। इसके विपरीत मौके पर छह मंजिला अपार्टमेंट खड़ा हो गया और उसमें कई फ्लैट विकसित किए गए।
इस मामले में एक और गंभीर सवाल जमीन को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक जिस जमीन पर एसए अपार्टमेंट बनाया गया है, वह एलडीए के इंप्रूवमेंट ट्रस्ट से जुड़ी जमीन बताई जा रही है। ऐसे में निर्माण की अनुमति, भूमि के उपयोग और स्वीकृत मानचित्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
अवैध निर्माण की निगरानी और उस पर कार्रवाई की जिम्मेदारी से जुड़े एलडीए के तत्कालीन इंजीनियरों और अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है और उनकी जिम्मेदारी तय करने के लिए सूची तैयार की जा रही है। एलडीए ने संबंधित जोनल अधिकारी से उन अभियंताओं की जानकारी मांगी है, जो निर्माण के दौरान वहां तैनात थे।
बताया गया है कि वर्ष 2020 में छठी मंजिल के निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया गया था और वर्ष 2022 में ध्वस्तीकरण का आदेश भी पारित हुआ था, लेकिन भवन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब पिलर क्षतिग्रस्त होने और इमारत के असुरक्षित होने के बाद मामला फिर सामने आया है।
एलडीए में फाइलों के डिजिटलाइजेशन के बावजूद इतनी महत्वपूर्ण इमारत की मूल फाइल का नहीं मिलना भी सवाल खड़े कर रहा है। अधिकारियों की ओर से फाइल तलाशने की बात कही जा रही है, लेकिन चार दिन बाद भी रिकॉर्ड उपलब्ध न होने से रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटलाइजेशन की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
फिलहाल एलडीए की ओर से अपार्टमेंट को ध्वस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। साथ ही निर्माण के दौरान तैनात रहे अभियंताओं और अधिकारियों की भूमिका की जानकारी जुटाई जा रही है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होती है और गायब फाइल का पता कब चलता है।


