– सदर तहसील में लेखपाल स्तर पर नियमों की अनदेखी
– शिक्षक भर्ती के आवेदन में प्रमाणपत्र बना अड़ंगा
– तहसीलदार का मौखिक आदेश मानने से लेखपाल का इंकार
फर्रुखाबाद। सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक व्यवस्था और निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद सदर तहसील में विवाहित महिला को जाति प्रमाणपत्र के लिए परेशान किया जा रहा है। शिक्षक भर्ती के लिए जाति प्रमाणपत्र की जरूरत वाली श्रीमती रजनी कटियार पत्नी प्रवीन कटियार, निवासी उस्मानगंज, विकासखंड कमालगंज, ने स्थानीय लेखपाल पर उनका आवेदन मोटी रिश्वत न देने के कारण निरस्त किए जाने का आरोप लगाया है।
सदर तहसील के ग्राम अलादादपुर मे तैनात शिक्षामित्र श्रीमती कटियार का मायका ग्राम निनौआ, परगना पहाड़ा में है। उनके पिता का नाम बृजनंदन लाल कटियार है। श्री मती रजनी का कहना है कि वह अपने पिता की जाति के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन कर रही हैं, लेकिन संबंधित लेखपाल आशुतोष पांडे द्वारा उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहा और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
रजनी कटियार के अनुसार उन्होंने मामले की जानकारी तहसीलदार सदर को दी, तहसीलदार ने मौखिक रूप से स्थानीय लेखपाल को प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए, इसके बावजूद प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया,लेखपाल ने बोल दिया, देखेंगे।
रजनी ने आरोप लगाया है कि भारी सुविधा शुल्क की मांग पूरी न होने के कारण प्रमाणपत्र जारी करने में टालमटोल की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि सिर्फ विवाह के कारण किसी महिला की जन्मजात जाति पति की जाति में परिवर्तित नहीं हो जाती। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अनुसूचित जाति के व्यक्ति से विवाह कर लेने से महिला को पति की जाति के आधार पर अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिल जाता।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल 2025 के एक निर्णय में उद्धृत भर्ती नियमों के संदर्भ में कहा गया है कि विवाहित महिला उम्मीदवारों को आरक्षण के लिए जाति प्रमाणपत्र पिता के नाम-पते के आधार पर निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करना होगा; पति के नाम-पते और आय के आधार पर जारी प्रमाणपत्र स्वीकार्य नहीं होगा।
इसलिए रजनी कटियार के मामले में उनकी पात्रता, पिता की जाति, उपलब्ध अभिलेख और लागू उत्तर प्रदेश के नियमों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।
मामले से परेशान रजनी कटियार ने अब पूरे प्रकरण की शिकायत जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर से करने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि पिता की जाति और अन्य आवश्यक अभिलेखों के आधार पर वह प्रमाणपत्र की पात्रता पूरी करती हैं तो उन्हें अनावश्यक रूप से तहसील और लेखपाल कार्यालय के चक्कर नहीं लगवाए जाने चाहिए।
इस संबंध में लेखपाल आशुतोष पांडे से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।


