क्रासर
फर्रुखाबाद में करीब 300 बैंक शाखाओं पर लटके रहे ताले, करोड़ों का लेनदेन और चेक क्लीयरिंग प्रभावित
फर्रुखाबाद। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने और पीएलआई में भेदभाव की नीति समाप्त करने की मांग को लेकर शुक्रवार को जिले के बैंक अधिकारी और कर्मचारी एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते जिलेभर की बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। बैंक शाखाओं के मुख्य द्वार पर ताले लटके रहे, जबकि ग्राहकों को बैंकिंग कार्यों के लिए परेशान होकर वापस लौटना पड़ा।
हड़ताल में स्टेट बैंक सहित सभी राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। फर्रुखाबाद जिले में करीब 300 बैंक शाखाओं में हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। बैंकिंग सेवाएं बंद रहने के कारण करोड़ों रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ और चेक क्लीयरिंग का काम भी पूरी तरह ठप रहा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस से जुड़े विभिन्न कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों ने हड़ताल में भाग लिया। संगठन पदाधिकारियों ने दावा किया कि उनके घटक संगठन लगभग शत-प्रतिशत बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
हड़ताल के दौरान बैंककर्मी सुबह करीब 10 बजे पंजाब नेशनल बैंक की लालगेट शाखा पर एकत्र हुए और जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने तथा पीएलआई में भेदभाव समाप्त करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांग लंबे समय से लंबित है और सरकार तथा बैंक प्रबंधन को इस दिशा में गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए आश्रय अवस्थी ने कहा कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। यह वैश्विक श्रम मानकों और समानता के सिद्धांत के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और जापान जैसे अधिकांश विकसित देशों में बैंक सोमवार से शुक्रवार तक ही काम करते हैं। इसके बावजूद भारत में बैंक कर्मचारियों से अभी भी छह दिन काम लिया जा रहा है, जो समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक, बीमा कंपनियों और कई सरकारी कार्यालयों में पहले से पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। ऐसे में बैंक कर्मचारियों के लिए भी पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। बैंककर्मियों का कहना है कि इससे कर्मचारियों को पर्याप्त साप्ताहिक अवकाश मिलेगा और वे बेहतर कार्यक्षमता के साथ ग्राहकों को सेवाएं दे सकेंगे।
पीएनबीएसए (उत्तर प्रदेश) के इटावा मंडल के प्रांतीय सहायक महामंत्री राजीव कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में बैंकिंग सेवाओं का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यम से संचालित हो रहा है। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, एटीएम और अन्य डिजिटल सेवाओं के माध्यम से ग्राहक चौबीसों घंटे बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग कर सकते हैं। ऐसे में शाखाओं के कार्यदिवस कम किए जाने से ग्राहकों को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा। इसके विपरीत कर्मचारियों की कार्यकुशलता, मानसिक स्वास्थ्य और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग अचानक नहीं उठाई गई है, बल्कि इसके लिए बैंक यूनियनों और बैंक प्रबंधन के बीच लंबे समय से वार्ता और सुलह की प्रक्रिया चलती रही है। उनके अनुसार 7 दिसंबर 2023 को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन तथा 8 मार्च 2024 को हुए सेटलमेंट और संयुक्त नोट में शेष सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित करने का प्रावधान दर्ज किया गया था।
बैंक यूनियन पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि भारतीय बैंक संघ की ओर से सरकार को सिफारिश किए जाने और कई बार समाधान का आश्वासन मिलने के बावजूद इस व्यवस्था को अभी तक लागू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि समझौते के प्रावधान को लंबित रखा जाना बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच असंतोष का कारण बन रहा है।
बैंककर्मियों ने यह भी कहा कि वर्तमान हड़ताल किसी विशेष सुविधा या विशेषाधिकार की मांग को लेकर नहीं है, बल्कि पहले से हुए समझौते को लागू कराने के लिए की जा रही है। यूनियन नेताओं के अनुसार श्रम कानून और सामूहिक सौदेबाजी की भावना के तहत हुए समझौते का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों ने कई बार आंदोलन और हड़ताल के प्रस्तावों को सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के आधार पर स्थगित किया, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण अब आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
बैंक कर्मचारियों ने कहा कि मार्च 2025 में भी वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की ओर से जल्द समाधान का आश्वासन मिलने के बाद प्रस्तावित हड़ताल वापस ली गई थी। इसके बावजूद पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू नहीं होने पर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी है।
हड़ताल के कारण शुक्रवार को बैंक शाखाओं में जमा-निकासी, चेक क्लीयरिंग सहित विभिन्न नियमित बैंकिंग कार्य प्रभावित रहे। कई ग्राहक बैंक शाखाओं तक पहुंचे, लेकिन ताले लटके होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। यूनियन नेताओं ने सरकार से मांग की कि पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने के साथ पीएलआई से जुड़े भेदभाव को समाप्त किया जाए और बैंक कर्मचारियों के हित में लंबित समझौते को शीघ्र लागू किया जाए।
धरना-प्रदर्शन में आश्रय अवस्थी, राजीव कुमार, राजीव सिंह चौहान, निखिल मिश्र, प्रदीप सोमवंशी, मानवेन्द्र चौहान, मयंक गुप्ता, ब्रजेश राय, धीरेन्द्र यादव और जयंत यादव समेत बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग को लेकर बैंककर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल


