फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने जिले में बाढ़ का संकट और गंभीर कर दिया है। दोनों नदियों का पानी खतरे के निशान के ऊपर पहुंचने से 103 से अधिक गांव प्रभावित हैं, जबकि 80 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। खेत, संपर्क मार्ग और निचले इलाकों में पानी भरने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मंगलवार को गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर बढ़कर 137.15 मीटर पर पहुंच गया। खतरे का निशान 137.10 मीटर है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार नरौरा बांध से गंगा में 1,05,633 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे जलस्तर में आगे भी बढ़ोतरी की आशंका है।
इधर रामगंगा भी तेजी से बढ़ रही है। नदी का जलस्तर 10 सेंटीमीटर बढ़कर 136.95 मीटर पहुंच गया है, जो चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से 35 सेंटीमीटर ऊपर है। खोह, हरेली और रामनगर बैराज से रामगंगा में 16,660 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों के 75 परिषदीय विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। शमसाबाद क्षेत्र के समैचीपुर चितार गांव पर अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। यहां अब तक 35 पक्के मकान और 28 झोपड़ियां कट चुकी हैं। प्रशासन ने गांव खाली कराकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई इलाकों में आवागमन प्रभावित होने के साथ पशुओं के लिए चारे और ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं। नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।


