81.35 लाख रुपये की परियोजना मंजूर, आश्रम में बनेंगे बहुउद्देश्यीय हॉल, सोलर पैनल, स्ट्रीट लाइट और बैठने की सुविधाएं
प्रकाश शर्मा
कन्नौज। इत्र की खुशबू के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाला कन्नौज अब ऋषि परंपरा और आयुर्वेद की विरासत के लिए भी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार कन्नौज के गुगरापुर विकासखंड स्थित च्यवन ऋषि आश्रम का पर्यटन विकास कराने जा रही है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास योजना के तहत आश्रम के विकास के लिए 81.35 लाख रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। परियोजना की पहली किस्त के रूप में 61 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं।
च्यवन ऋषि आश्रम को भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और आयुर्वेदिक ज्ञान की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि च्यवन ने इसी स्थान पर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। अब पर्यटन विभाग इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल को आधुनिक पर्यटक सुविधाओं से जोड़ने की तैयारी में है।
आश्रम में बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं
आश्रम के पर्यटन विकास का काम उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के माध्यम से कराया जाएगा। परिसर और आसपास पर्यटकों की सुविधा के लिए कई निर्माण एवं विकास कार्य प्रस्तावित हैं।
आश्रम के निकट बहुउद्देश्यीय हॉल का निर्माण कराया जाएगा। परिसर में पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। रात में रोशनी के लिए स्ट्रीट लाइट, आगंतुकों के बैठने के लिए आरसीसी बेंच तथा पर्यटकों के मार्गदर्शन के लिए संकेतक बोर्ड लगाए जाएंगे।
सरकार का जोर आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर है।
च्यवनप्राश से जुड़ी है पौराणिक कथा
च्यवन ऋषि आश्रम की पहचान आयुर्वेद और च्यवनप्राश की परंपरा से भी जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि च्यवन ने इसी तपोभूमि पर कठोर साधना की थी। तपस्या के दौरान उनके चारों ओर दीमक का विशाल टीला बन गया था।
इसी स्थान से राजकुमारी सुकन्या से जुड़ी प्रसिद्ध कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि सुकन्या की सेवा और समर्पण तथा अश्विनी कुमारों के आशीर्वाद से महर्षि च्यवन को पुनः यौवन और दृष्टि प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेद और मानव स्वास्थ्य के कल्याण के लिए शोध कार्य किया। इसी ज्ञान परंपरा से च्यवनप्राश के उद्भव की मान्यता जुड़ी है।
कन्नौज में आध्यात्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा : जयवीर सिंह
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि कन्नौज स्थित च्यवन ऋषि आश्रम भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और आयुर्वेदिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर है। ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वाले स्थल के विकास से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी तथा श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि च्यवन ऋषि का नाम आज भी च्यवनप्राश के माध्यम से घर-घर में जाना जाता है। आश्रम के विकास से कन्नौज में आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
लाख बहोसी से मेहंदी घाट तक पर्यटन की लंबी श्रृंखला
कन्नौज आने वाले पर्यटकों के लिए च्यवन ऋषि आश्रम के अलावा कई अन्य धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल भी आकर्षण का केंद्र हैं। इनमें लाख बहोसी पक्षी अभयारण्य, कन्नौज पुरातात्विक संग्रहालय, तिर्वा का माता अन्नपूर्णा मंदिर, गंगा तट का मेहंदी घाट, स्वयंभू बाबा गौरी शंकर मंदिर और 52 खंभों वाली मकदूम जहानिया प्रमुख हैं।
पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में 21.73 लाख से अधिक पर्यटक कन्नौज के विभिन्न पर्यटन, धार्मिक और विरासत स्थलों पर पहुंचे। च्यवन ऋषि आश्रम के विकास के बाद जिले में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन की संभावनाओं को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।


