डॉ. विजय गर्ग
विज्ञान का उद्देश्य केवल कक्षा की चारदीवारी तक सीमित रहना या पाठ्यपुस्तकों के पन्नों में बंद रहना नहीं है। वास्तविक वैज्ञानिक शिक्षा तब शुरू होती है, जब विद्यार्थी अपने आसपास की दुनिया को देखते हैं, प्रश्न पूछते हैं, प्रयोग करते हैं और नई खोज करते हैं। दुर्भाग्यवश, अनेक विद्यालयों, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों के स्कूलों में, अच्छी तरह से सुसज्जित विज्ञान प्रयोगशालाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में “पहियों पर विज्ञान” (Science on Wheels) की अवधारणा शिक्षा में परिवर्तन लाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन सकती है।
पहियों पर विज्ञान से आशय एक ऐसी चलती-फिरती विज्ञान प्रयोगशाला से है, जो वैज्ञानिक उपकरणों, मॉडलों, प्रयोगों और शिक्षण सामग्री के साथ एक स्कूल या समुदाय से दूसरे तक पहुंचती है। हर बच्चे से यह अपेक्षा करने के बजाय कि वह किसी बड़ी प्रयोगशाला या विज्ञान केंद्र तक पहुंचे, प्रयोगशाला स्वयं विद्यार्थियों के पास पहुंचती है। इससे व्यावहारिक शिक्षा उन बच्चों तक भी पहुंचती है, जिन्हें पाठ्यपुस्तकों से आगे विज्ञान को अनुभव करने के अवसर कम मिलते हैं।
एक मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रयोगों के लिए आवश्यक उपकरण शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त माइक्रोस्कोप, मानव शरीर के मॉडल, बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सौर ऊर्जा के प्रदर्शन और अन्य इंटरैक्टिव वैज्ञानिक साधन भी उपलब्ध हो सकते हैं। प्रशिक्षित शिक्षकों और विज्ञान शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थी स्वयं प्रयोग कर सकते हैं। ऐसे प्रत्यक्ष अनुभव वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने और लंबे समय तक याद रखने में मदद करते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई विद्यार्थी पुस्तक में प्रकाश के परावर्तन के बारे में पढ़ सकता है, लेकिन दर्पण के माध्यम से प्रकाश के परावर्तन को अपनी आंखों से देखना उस अवधारणा को अधिक स्पष्ट और अर्थपूर्ण बना देता है। इसी प्रकार, माइक्रोस्कोप के नीचे किसी पत्ते या पानी की एक बूंद का अध्ययन ऐसी जिज्ञासा पैदा कर सकता है, जिसे केवल लिखित विवरण से उत्पन्न करना कठिन है। विज्ञान तब रोमांचक बनता है, जब बच्चों को यह पूछने की स्वतंत्रता मिलती है कि “ऐसा क्यों होता है?” और फिर वे अवलोकन तथा प्रयोगों के माध्यम से उसका उत्तर खोजते हैं।
पहियों पर विज्ञान की यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण विद्यालयों के लिए अत्यंत उपयोगी हो सकती है। अनेक छोटे स्कूल महंगी प्रयोगशालाएं स्थापित करने या उन्नत वैज्ञानिक उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं होते। एक साझा मोबाइल प्रयोगशाला किसी क्षेत्र के कई विद्यालयों तक पहुंच सकती है और विद्यार्थियों को ऐसे संसाधन उपलब्ध करा सकती है, जो उन्हें अन्यथा नहीं मिल पाते। इस प्रकार मोबाइल प्रयोगशालाएं शहरी और ग्रामीण विद्यार्थियों के बीच शिक्षा के अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह कार्यक्रम वैज्ञानिक जिज्ञासा की संस्कृति को भी प्रोत्साहित कर सकता है। बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं, लेकिन पारंपरिक शिक्षा प्रणाली कई बार तथ्यों को याद करने और परीक्षाओं की तैयारी पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित कर देती है। एक मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला विद्यार्थियों का ध्यान उत्तर याद करने से प्रश्न पूछने की ओर मोड़ सकती है। विद्यार्थी समझ सकते हैं कि विज्ञान केवल सूत्रों और परिभाषाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि दुनिया को समझने का एक तरीका है।
पहियों पर विज्ञान विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए भी प्रेरित कर सकता है। अनेक युवा विद्यार्थियों के लिए, विशेषकर उन बच्चों के लिए जिन्होंने कभी आधुनिक प्रयोगशाला नहीं देखी, वैज्ञानिक उपकरणों को देखना और स्वयं प्रयोग करना नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। एक प्रेरणादायक अनुभव भी किसी बच्चे को वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, पर्यावरणविद् या नवप्रवर्तक बनने के लिए प्रेरित कर सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तेजी से विकसित होती प्रौद्योगिकी के युग में व्यावहारिक वैज्ञानिक शिक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है। विद्यार्थियों को अवलोकन, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान और रचनात्मकता जैसे कौशल विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए। ये कौशल केवल पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से विकसित नहीं किए जा सकते। स्वयं प्रयोग करने से विद्यार्थी अनुमान लगाना, विचारों की जांच करना, गलतियों को पहचानना और परिणामों से सीखना सीखते हैं।
मोबाइल प्रयोगशालाएं विज्ञान को दैनिक जीवन से भी जोड़ सकती हैं। स्वच्छ पानी, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रदर्शन विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता कर सकते हैं कि विज्ञान उनके समुदाय और दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित करता है। इस प्रकार विज्ञान केवल परीक्षाओं का विषय नहीं रहता, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने का एक माध्यम बन जाता है।
सरकारें, शैक्षणिक संस्थान, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संगठन और निजी कंपनियां मिलकर “पहियों पर विज्ञान” अभियान का विस्तार कर सकती हैं। प्रशिक्षित शिक्षकों के सहयोग से तैयार की गई मोबाइल प्रयोगशालाएं गांवों और छोटे कस्बों के हजारों विद्यार्थियों तक पहुंच सकती हैं। डिजिटल उपकरण और इंटरैक्टिव प्रौद्योगिकी भी ऐसे कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
शिक्षा का भविष्य किसी विद्यालय के स्थान या किसी समुदाय की आर्थिक क्षमता पर निर्भर नहीं होना चाहिए। प्रत्येक बच्चे को खोज करने, प्रयोग करने और नई चीजें सीखने का अवसर मिलना चाहिए। पहियों पर विज्ञान उन स्थानों तक प्रयोगशाला पहुंचा सकता है, जहां प्रयोगशालाएं मौजूद नहीं हैं, और उन बच्चों तक वैज्ञानिक जिज्ञासा पहुंचा सकता है, जिन्हें शायद कभी विज्ञान को निकट से अनुभव करने का अवसर न मिले।
खोज को कक्षा से बाहर ले जाकर मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाएं शिक्षा को अधिक समावेशी, व्यावहारिक और प्रेरणादायक बना सकती हैं। जब विज्ञान पहियों पर यात्रा करता है, तो वह केवल उपकरण ही नहीं ले जाता—वह अपने साथ जिज्ञासा, आत्मविश्वास, कल्पनाशक्ति और एक बेहतर भविष्य की संभावनाएं भी लेकर चलता है।
विज्ञान को हमेशा विद्यार्थियों के उसके पास आने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। कभी-कभी विज्ञान को स्वयं विद्यार्थियों तक पहुंचना पड़ता है।
डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्रिंसिपल एवं प्रख्यात विज्ञान लेखक
स्ट्रीट कौर चंद, एम.एच.आर., मलोट
पंजाब – 152107
मोबाइल: 9465682110


