गोरखपुर। शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सैफई महोत्सव में खर्च होने वाले पैसों के कुछ हिस्से से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था बदली जा सकती थी। उन्होंने कहा कि जितने पैसे बर्मिंघम से रथ मंगाने में खर्च होते थे, उतने में बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता था।
गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 81 शिक्षकों को सम्मानित किया। इनमें बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षक शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने प्रोटोकॉल से अलग हटकर सभी शिक्षकों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया।
योगी ने कहा कि शिक्षक बच्चों को संस्कार और शिक्षा देने का काम करते हैं, इसलिए उनका सम्मान भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया था कि केवल 10 शिक्षक मंच पर आएंगे, लेकिन दूर-दराज से आए सभी शिक्षकों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय परीक्षा केंद्रों पर ठेके पर नकल होती थी और दूसरे राज्यों से विद्यार्थी पैसे देकर परीक्षा पास करने आते थे। कई विद्यालय नकल के अड्डे बन गए थे। सरकार ने ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाना बंद किया और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।
योगी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 2,100 से अधिक विद्यालयों के भवनों को बेहतर बनाया गया है। निपुण अभियान के जरिए बच्चों की बुनियादी शिक्षा मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा के साथ कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी दी जा रही है। शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये और अनुदेशकों का 17 हजार रुपये किया गया है। सरकार का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार और बेहतर भविष्य देना है।
समारोह में राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 से 76 शिक्षकों और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार-2025 से पांच शिक्षकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और 25 हजार रुपये की सम्मान राशि के साथ दो वर्ष का सेवा विस्तार भी दिया गया।


