पांचालघाट पर 136.95 मीटर पहुंचा
फर्रुखाबाद। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर कटरी क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पांचालघाट पर शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर बढ़कर 136.95 मीटर पहुंच गया। खतरे का निशान 137.10 मीटर है, ऐसे में नदी अब इससे महज 15 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। पिछले तीन दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब 30 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलस्तर लगातार बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों में बाढ़ को लेकर आशंका बढ़ गई है।
शनिवार सुबह नरौरा बांध से 87,053 क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 1,12,528 क्यूसेक और हरिद्वार बैराज से 1,13,202 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। तीनों बैराजों से कुल 3,12,783 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है। एक दिन पहले तीनों बैराजों से कुल 2,67,035 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। इस हिसाब से शनिवार को करीब 45,748 क्यूसेक अधिक पानी गंगा में छोड़ा गया।
गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के आंकड़े भी नदी के बढ़ते तेवर को साफ दिखा रहे हैं। दो सितंबर को पांचालघाट पर जलस्तर 136.65 मीटर था। तीन सितंबर को यह बढ़कर 136.75 मीटर, चार सितंबर को 136.90 मीटर और शनिवार को 136.95 मीटर पहुंच गया। यानी चार सितंबर की तुलना में शनिवार को भी गंगा के जलस्तर में पांच सेंटीमीटर की वृद्धि हुई।
गंगा का चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर निर्धारित है। मौजूदा जलस्तर चेतावनी बिंदु से 35 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है। नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कटरी क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। खेतों और निचले इलाकों में पानी पहुंचने की आशंका के चलते लोग नदी के रुख पर नजर बनाए हुए हैं।
रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ा
गंगा के साथ रामगंगा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। दो सितंबर को रामगंगा का जलस्तर 136.10 मीटर दर्ज किया गया था, जो शनिवार सुबह बढ़कर 136.40 मीटर हो गया। दो दिनों में रामगंगा के जलस्तर में 30 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है। शनिवार सुबह रामगंगा नदी में भी 15,393 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
गंगा और रामगंगा दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कटरी क्षेत्र में बाढ़ की आशंका को फिर बढ़ा दिया है। प्रशासन और सिंचाई विभाग नदी के जलस्तर और बांधों से छोड़े जा रहे पानी पर लगातार नजर रखे हुए हैं। आने वाले घंटों में यदि बैराजों से पानी की निकासी बढ़ती है और जलस्तर इसी रफ्तार से ऊपर जाता है तो निचले इलाकों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने की जरूरत बढ़ गई है।


