900 करोड़ की परियोजना का अनुमान, पांचाल घाट से बदायूं-कासगंज सीमा तक बढ़ेगी लंबाई
फर्रुखाबाद। गंगा की बाढ़ से हर वर्ष होने वाली तबाही और किसानों को होने वाले भारी नुकसान से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में बड़ी पहल की तैयारी है। जिले में गंगा किनारे करीब 84 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। परियोजना पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। तटबंध बनने के बाद सदर, अमृतपुर और कायमगंज तहसील क्षेत्र के करीब 200 गांवों को बाढ़ के खतरे से राहत मिलने की उम्मीद है।
पहले 49 किमी था प्रस्ताव, अब 84 किमी तक बढ़ेगा
पूर्व में तटबंध की लंबाई करीब 49 किलोमीटर निर्धारित की गई थी, लेकिन बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों को व्यापक सुरक्षा देने के लिए इसकी लंबाई बढ़ाने का फैसला किया गया है। अब तटबंध का निर्माण पांचाल घाट से ढाईघाट की ओर बदायूं सीमा तक तथा कायमगंज क्षेत्र में कासगंज सीमा तक कराने की योजना है।
ढाईघाट की ओर करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त लंबाई बढ़ाई जाएगी। इससे शमसाबाद क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों को भी परियोजना में शामिल किया जाएगा। वहीं कायमगंज क्षेत्र में कासगंज सीमा तक करीब 25 किलोमीटर तटबंध बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
हर साल एक लाख से अधिक आबादी होती है प्रभावित
गंगा का जलस्तर बढ़ने पर जिले के बड़ी संख्या में गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। हर साल एक लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न होने के साथ हजारों बीघा कृषि भूमि में नुकसान होता है। कई स्थानों पर सड़कें और संपर्क मार्ग कट जाने से ग्रामीणों का आवागमन तक प्रभावित हो जाता है।
बाढ़ का पानी लंबे समय तक भरे रहने से ग्रामीणों को महीनों तक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किसानों के सामने फसल बर्बादी के साथ पशुओं के चारे और सुरक्षित आवागमन की समस्या भी खड़ी हो जाती है।
260 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की तैयारी
तटबंध निर्माण के लिए करीब 260 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। पहले प्रस्तावित परियोजना के लिए 133 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही थी। तटबंध की लंबाई बढ़ने के बाद भूमि की आवश्यकता भी लगभग दोगुनी हो गई है।
सिंचाई विभाग की ओर से किसानों से भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति लेने की प्रक्रिया जारी है। विभाग का कहना है कि किसानों की सहमति मिलने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने में तेजी आएगी।
45 गांवों से होकर गुजरेगा तटबंध
प्रस्तावित तटबंध जिले की तीनों तहसीलों के करीब 45 गांवों से होकर गुजरेगा। परियोजना का उद्देश्य केवल कुछ चुनिंदा गांवों को बाढ़ से बचाना नहीं, बल्कि गंगा के किनारे बसे बड़े क्षेत्र को बाढ़ की समस्या से स्थायी सुरक्षा देना है।
तटबंध बनने के बाद बाढ़ के दौरान खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पानी फैलने की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किए जाने की उम्मीद है।
डेढ़ माह में तैयार होगा नया प्रस्ताव
तटबंध की लंबाई बढ़ाए जाने के कारण सिंचाई विभाग को परियोजना का प्रस्ताव नए सिरे से तैयार करना होगा। विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार के अनुसार, नया प्रस्ताव तैयार करने में करीब डेढ़ माह का समय लग सकता है। इसके बाद प्रस्ताव को स्वीकृति की प्रक्रिया के लिए आगे भेजा जाएगा।
गंगा की ड्रेजिंग का भी प्रस्ताव
तटबंध के साथ गंगा की ड्रेजिंग यानी नदी की तलहटी से गाद और जमा सामग्री हटाने की योजना भी प्रस्तावित है। सिंचाई विभाग की ओर से ड्रेजिंग के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है। इसका कार्य नलकूप विभाग से कराया जाना प्रस्तावित है। ड्रेजिंग पर होने वाले खर्च का विस्तृत एस्टीमेट अभी विभाग को प्राप्त नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद तेज हुई कवायद
तीन सितंबर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंगा की ड्रेजिंग और तटबंध निर्माण का आश्वासन दिया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तटबंध की लंबाई बढ़ाकर व्यापक क्षेत्र को सुरक्षा देने की कवायद तेज हुई है।
किसानों की सहमति पर टिकी निर्माण की रफ्तार
सिंचाई विभाग ने किसानों से जल्द से जल्द भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि संबंधी प्रक्रिया जितनी जल्दी पूरी होगी, परियोजना को स्वीकृति और निर्माण की दिशा में उतनी ही तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
करीब 900 करोड़ रुपये की लागत वाली यह प्रस्तावित परियोजना यदि धरातल पर उतरती है तो फर्रुखाबाद के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए इसे लंबे समय से चली आ रही समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


