भारत के पहले भू-समकालिक इमेजिंग उपग्रह का सफल प्रक्षेपण, अंतरिक्ष से पृथ्वी की लगातार निगरानी की क्षमता होगी मजबूत
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को सुबह 2 बजकर 55 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण परिसर से उड़ान भरी और अत्याधुनिक ईओएस-05 पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को निर्धारित उप-भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया।
प्रक्षेपण के करीब 18 मिनट बाद जीएसएलवी-एफ17 ने ईओएस-05 को निर्धारित कक्षा में स्थापित किया। इस मिशन में लगभग 2,367 किलोग्राम वजनी उपग्रह को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। इसरो के अनुसार उपग्रह की स्थिति सामान्य है और उसके सौर पैनल भी सफलतापूर्वक खुल गए हैं।
ईओएस-05 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत का पहला समर्पित इमेजिंग उपग्रह है, जिसे भू-समकालिक कक्षा से पृथ्वी का अवलोकन करने के लिए तैयार किया गया है। अंतिम परिचालन कक्षा में पहुंचने के बाद उपग्रह करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी के एक बड़े क्षेत्र पर लंबे समय तक निगरानी रखने में सक्षम होगा।
इस क्षमता से सामान्य पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों की तुलना में किसी क्षेत्र की अधिक लगातार निगरानी संभव होगी। इससे कृषि, जल संसाधन, शहरी नियोजन, पर्यावरण निगरानी, वन क्षेत्र, समुद्री संसाधन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण आंकड़े मिलने की उम्मीद है।
जीएसएलवी-एफ17, भारत के भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान की 19वीं उड़ान है। तीन चरणों वाले इस प्रक्षेपण यान में ठोस, द्रव और क्रायोजेनिक प्रणोदन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस मिशन में जीएसएलवी ने अब तक अपने द्वारा ले जाए गए सबसे भारी उपग्रह को निर्धारित कक्षा तक पहुंचाया।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर खुशी जताते हुए बताया कि ईओएस-05 को सटीक रूप से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है और उपग्रह पूरी तरह स्वस्थ है। उन्होंने इस सफलता को इसरो के वैज्ञानिकों, औद्योगिक साझेदारों और शिक्षण संस्थानों के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जीएसएलवी-एफ17 और ईओएस-05 मिशन की सफलता पर इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि यह सफलता देश की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता, नवाचार और इसरो तथा भारतीय उद्योग के बीच मजबूत होते सहयोग को दर्शाती है।


