नई दिल्ली। सितंबर की शुरुआत आम आदमी के लिए महंगाई की कई खबरें लेकर आई है। दूध और चीनी की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर टैक्स बढ़ा दिया है। हालांकि, घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर मौजूदा कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मुंबई में दूध 9 रुपये महंगा: 1 सितंबर से मुंबई और आसपास के महानगरीय क्षेत्र में थोक दूध की कीमत 93 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह बढ़ोतरी छह महीने के लिए लागू रहेगी। दूध उत्पादकों ने पशुओं के चारे, अनाज और अन्य लागत में बढ़ोतरी को इसका कारण बताया है। चारे की कुछ प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक वृद्धि का भी हवाला दिया गया है।
तमिलनाडु में भी दूध उत्पादकों को मिलने वाले खरीद मूल्य में 6 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। नया खरीद मूल्य 44 रुपये प्रति लीटर होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ताओं के लिए दूध भी तत्काल 6 रुपये महंगा हो जाएगा; खुदरा कीमत पर अंतिम फैसला अलग से होगा।
चीनी पर सरकार सख्त: चीनी की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र ने डीलरों के अधिकतम भंडारण की सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी है। यह व्यवस्था 15 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी। सरकार का लक्ष्य बाजार में कृत्रिम कमी रोककर कीमतों को नियंत्रित करना है। साथ ही, घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी गई है।
पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर बढ़ा टैक्स: 1 सितंबर से पेट्रोल के निर्यात पर 1.50 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगाया गया है, जबकि डीजल पर लागू कुल शुल्क ढांचे में बढ़ोतरी की गई है। वहीं विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लेवी में 50 पैसे प्रति लीटर की कमी की गई है। घरेलू खपत के लिए पेट्रोल-डीजल पर मौजूदा दरें जस की तस हैं।
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर कंपनियों द्वारा ज्यादा मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ाने की स्थिति में घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। निर्यात पर टैक्स बढ़ाने का उद्देश्य देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और बाजार में संतुलन कायम रखना है।


