आरएसएस प्रमुख ने कहा- शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं, संस्कार और जिम्मेदारी की समझ भी जरूरी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज में शिक्षा और जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए उसका शिक्षित और जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि समाज को शिक्षित करने का प्रयास नहीं किया जाता है तो उसमें भटकाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
मोहन भागवत ने कहा, “अगर हम समाज को शिक्षित नहीं करते हैं, तो भटकाव आता है।” उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्ति को पढ़ा-लिखाकर डिग्री दिलाना नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति में विवेक, संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और सही-गलत को समझने की क्षमता भी विकसित होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती उसके जागरूक नागरिकों पर निर्भर करती है। जब लोग अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझते हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। इसके विपरीत शिक्षा और जागरूकता का अभाव लोगों को भ्रम, गलत धारणाओं और भटकाव की ओर ले जा सकता है।
आरएसएस प्रमुख ने शिक्षा को व्यक्ति के विचार और व्यवहार को दिशा देने वाला माध्यम बताया। उनका कहना है कि ज्ञान के साथ विवेक का विकास भी आवश्यक है। व्यक्ति जब विषयों को समझने, सवाल पूछने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करता है, तभी वह अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज में शिक्षा का प्रसार केवल औपचारिक शिक्षण संस्थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। परिवार, समाज और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।
मोहन भागवत के बयान का मूल संदेश समाज में शिक्षा और जागरूकता को मजबूत करने से जुड़ा है। उन्होंने संकेत दिया कि शिक्षित समाज अपने सामने आने वाली चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझ सकता है और परिस्थितियों के अनुसार सही निर्णय ले सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा और सही जानकारी पहुंचाना जरूरी है। इससे लोगों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सामाजिक समस्याओं के समाधान में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं।
भागवत का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और युवाओं की भूमिका को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। उनके वक्तव्य में समाज को शिक्षित, जागरूक और जिम्मेदार बनाने पर विशेष जोर दिया गया।


