काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रविवार तक 788 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,502 लोग लापता हैं। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए सेना, पुलिस और विशेषज्ञों की टीमें दिन-रात अभियान चला रही हैं।
सबसे बड़ी चिंता विभिन्न हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 898 कर्मचारियों को लेकर है। इनमें से 361 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में बचाव अभियान सबसे चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सुरंग मिट्टी और गाद से भर गई है। बचावकर्मियों ने ऊपरी हिस्से में छह इंच का छेद कर पाइप से हवा पहुंचाई है। अब इस छेद को बड़ा कर मैनहोल बनाने की तैयारी है, ताकि बचाव दल अंदर पहुंच सके। सुरंग में मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों और ब्लास्टिंग का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
18,708 जवान और 16 हेलिकॉप्टर राहत में जुटे
नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 18,708 जवान लगाए हैं। करीब 16 हेलिकॉप्टर प्रभावित क्षेत्रों में एयरलिफ्ट और राहत कार्य में लगे हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। रसुवा के तिमुरे क्षेत्र में बचावकर्मियों ने मलबे के नीचे से तीन दिन बाद छह साल की बच्ची को जिंदा निकाल लिया, जिसे इलाज के लिए काठमांडू भेजा गया।
चितवन में मिले सबसे ज्यादा शव
बाढ़ के बाद नदियों के निचले इलाकों में बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं। चितवन में ही 264 शव मिलने की सूचना है। नेपाल सरकार के सामने शवों की पहचान और सुरक्षित रखने की भी बड़ी चुनौती है। सीमित कोल्ड स्टोरेज सुविधा के कारण नेपाल ने दूसरे देशों से शवों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर और अन्य संसाधनों की मदद मांगी है।
सड़कें-पुल तबाह, गांवों का संपर्क टूटा
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले पासांग ल्हामु हाईवे का 40 किलोमीटर से अधिक हिस्सा मलबे में दब गया है। रसुवा और नुवाकोट के 18 से अधिक पहाड़ी गांव सड़क संपर्क से कट गए हैं। कई स्थानों पर लोगों तक पहुंचने के लिए पैदल रास्ते या हेलिकॉप्टर का सहारा लिया जा रहा है। नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में सहयोग मांगा है।
ग्यिरोंग पोर्ट में भी भारी तबाही
चीन-नेपाल सीमा के ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी नुकसान पहुंचाया है। यहां 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 49 भारतीय, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं। तिब्बत में भी आपदा से 16 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत ने नेपाल के राहत अभियान के लिए अब तक 68.5 टन राहत सामग्री भेजी है। कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, स्वच्छता किट समेत जरूरी सामान के साथ सुरंग बचाव विशेषज्ञ, तकनीकी दल और फोरेंसिक विशेषज्ञ भी नेपाल भेजे गए हैं। भारत से राहत सामग्री लेकर चौथी खेप भी काठमांडू पहुंच चुकी है। नेपाल में फंसे भारतीयों को निकालने का अभियान जारी है और विदेश मंत्रालय ने 149 रेस्क्यू किए गए भारतीयों की सूची जारी की है।
फिर बढ़ा भोटेकोशी नदी का खतरा
राहत अभियान के बीच रसुवा में भोटेकोशी नदी का बहाव बढ़ने की सूचना से नई चिंता पैदा हो गई है। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। वहीं, नेपाल-चीन सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झील का अधिकांश पानी प्राकृतिक रास्ते से निकल गया है, जिससे फिलहाल अचानक बड़ी बाढ़ का खतरा कम हुआ है।
नेपाल की इस त्रासदी में जान-माल की भारी क्षति, हजारों लोगों का विस्थापन और सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की जिंदगी बचाने की चुनौती के बीच राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और कनाडा समेत कई देशों ने नेपाल के लिए आर्थिक और मानवीय सहायता का ऐलान किया है।


