अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले के बाद अयोध्या में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इसी क्रम में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के वरिष्ठ नेता एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय इन दिनों अयोध्या के विभिन्न मंदिरों और मठों में पहुंचकर संत-महात्माओं से मुलाकात कर रहे हैं। इस दौरान वह संतों को रामलला का प्रसाद भेंट कर उनका आशीर्वाद ले रहे हैं और उनसे संवाद स्थापित कर रहे हैं।
राजनीतिक और धार्मिक हलकों में इन मुलाकातों को हालिया विवाद के बाद ट्रस्ट और वीएचपी की ओर से भरोसा बहाल करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, संत समाज के बीच फैली शंकाओं और भ्रम को दूर करने के लिए यह संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि इस अभियान को लेकर ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद व्यापक जांच शुरू हुई थी। जांच एजेंसियों ने कई लोगों को गिरफ्तार किया और सुरक्षा व्यवस्था तथा चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर संकेत किया। इसके बाद ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव भी किए गए और संगठनात्मक ढांचे में सुधार की प्रक्रिया शुरू हुई।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद संसद में भी राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष लगातार इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार विपक्ष पर धार्मिक आस्था के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगा रही है। इस मुद्दे को लेकर संसद के भीतर और बाहर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।
अयोध्या की धार्मिक परंपरा में संत समाज की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। ऐसे में चंपत राय का मंदिर-मंदिर जाकर संतों से मिलना केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि धार्मिक नेतृत्व का विश्वास बनाए रखने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इन बैठकों में मंदिर की व्यवस्था, श्रद्धालुओं का विश्वास और भविष्य में पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हो रही है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विभिन्न एजेंसियां साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर जांच कर रही हैं। ऐसे में मामले से जुड़े सभी आरोपों और जिम्मेदारियों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकरण की आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।


