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Sunday, July 26, 2026

प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग सख्त, डिप्टी सीएमओ ने निजी अस्पतालों का किया निरीक्षण

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फर्रुखाबाद। आवास विकास कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों की निगरानी तेज कर दी है। इसी क्रम में डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) डॉ. आर.सी. माथुर ने शहर के मसेनी चौराहा एवं पांचालघाट रोड क्षेत्र स्थित निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पतालों के पंजीकरण संबंधी दस्तावेज, आवश्यक अभिलेख और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पतालों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं, पंजीकरण की स्थिति और निर्धारित मानकों का परीक्षण किया। टीम से जुड़े सूत्रों के अनुसार कुल चार अस्पतालों की जांच की गई, जिनमें से दो अस्पतालों में कुछ कमियां सामने आईं। हालांकि, अधिकारियों ने इन कमियों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया।
डिप्टी सीएमओ डॉ. आर.सी. माथुर ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दो अस्पतालों—अम्मा हॉस्पिटल और आराध्या हॉस्पिटल—का निरीक्षण किया। उनके अनुसार दोनों अस्पताल विधिवत पंजीकृत पाए गए और वहां आवश्यक व्यवस्थाएं संतोषजनक थीं। उन्होंने कहा कि इन दोनों अस्पतालों में अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) की आवश्यकता लागू नहीं होती, इसलिए इस संबंध में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
हालांकि, क्षेत्र में कुछ निजी अस्पतालों के फायर सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। कई स्थानों पर फायर एनओसी के नवीनीकरण और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में हालिया निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।
प्रसूता की मौत की घटना के बाद जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर निगरानी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यदि किसी अस्पताल में नियमों का उल्लंघन या गंभीर अनियमितता पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग का उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा सभी निजी अस्पतालों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य निजी अस्पतालों का भी चरणबद्ध तरीके से निरीक्षण किया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का प्रभावी ढंग से आकलन किया जा सके।

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