33.2 C
Lucknow
Friday, July 24, 2026

गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, 200 गायों से ₹2 करोड़ सालाना आय के मॉडल पर मंथन

Must read

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार गोशालाओं को केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित न रखकर उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, प्राकृतिक खेती और स्थानीय उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को लखनऊ के इंदिरा भवन में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने उद्यमियों, नवाचारी किसानों, गोसेवी संस्थाओं और गोशाला संचालकों के साथ व्यापक संवाद आयोजित किया।

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गोसंरक्षण को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। उद्देश्य यह है कि गोशालाएं आत्मनिर्भर बनें और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा हों।
बैठक में ग्लोबल कन्फेडरेशन ऑफ काउ-बेस्ड इंडस्ट्रीज के सचिव पुरीष कुमार ने एक विस्तृत आर्थिक मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यदि 200 गायों वाली गोशाला में दूध, गोबर और गोमूत्र का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यवर्धन किया जाए तथा बायोगैस, बिजली, जैविक खाद, प्राकृतिक कृषि इनपुट और अन्य गो-आधारित उत्पादों का व्यवस्थित उत्पादन हो, तो करीब ₹2 करोड़ तक की संभावित वार्षिक आय अर्जित की जा सकती है। इससे गोशालाएं संरक्षण केंद्र के साथ-साथ लाभकारी ग्रामीण उद्यम भी बन सकती हैं।
गुजरात के बनासकांठा जिले की गोमूत्र डेयरी से जुड़े देवाराम पुरोहित ने बताया कि अबाला गांव में गोमूत्र के वैज्ञानिक संग्रहण और प्रसंस्करण के माध्यम से प्राकृतिक खेती के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ रही है और रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
ग्राम धाम गोशाला, सिद्धपुरा (लखनऊ) के संचालक एवं पूर्व पुलिस उपाधीक्षक शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने गोबर आधारित विद्युत उत्पादन मॉडल की जानकारी दी। वहीं ‘पे अमृत’ संस्था के निदेशक प्रवीण मिश्रा ने कहा कि भविष्य की गोशालाएं ग्रामीण सर्कुलर बायो-इकोनॉमी हब के रूप में विकसित होंगी, जहां गोबर से ऊर्जा और जैविक खाद तथा गोमूत्र से प्राकृतिक कृषि उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
रूरल हब इनोवेशंस लिमिटेड के गौरव गुप्ता ने तकनीक, बाजार और उद्यमिता को गोशालाओं से जोड़कर ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं में हो रहे नवाचारों को श्रेष्ठ तकनीकों और सफल मॉडलों से जोड़ा जाएगा, ताकि गोसंरक्षण के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और ग्रामीण समृद्धि का स्थायी मॉडल तैयार किया जा सके।
बैठक में आयोग के सदस्य राजेश सिंह सेंगर, दीपक गोयल और रमाकांत उपाध्याय सहित अनेक उद्यमी, गोशाला संचालक और गोसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article