– डीएम डॉ. अंकुर लाठर के नेतृत्व में फर्रुखाबाद ने जननी सुरक्षा योजना में रचा इतिहास
– सीएमओ डॉ आनंद उपाध्याय की एक्शन प्रणाली ने बदल दिए हालात
फर्रुखाबाद। कुछ ही महीनों पहले तक स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर पिछड़े प्रदर्शन के लिए चर्चा में रहने वाला फर्रुखाबाद अब प्रदेश के लिए मिसाल बन गया है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के नेतृत्व और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय की रणनीतिक कार्यशैली ने स्वास्थ्य विभाग की तस्वीर बदल दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित जननी सुरक्षा योजना में फर्रुखाबाद ने मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने के बाद अब जन सुरक्षा पर अभियान चलेगा ।
यह उपलब्धि केवल रैंकिंग में सुधार नहीं, बल्कि हजारों गर्भवती महिलाओं तक समयबद्ध वित्तीय सहायता, सुरक्षित संस्थागत प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच का परिणाम है। कभी 63वें स्थान पर रहने वाला जनपद आज प्रदेश के शीर्ष जिलों में शामिल हो चुका है।
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 के बीच जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में 4,462 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें से 3,682 पात्र महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया गया। इस प्रकार 82.52 प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करते हुए फर्रुखाबाद ने प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए विभागीय अधिकारियों की नियमित समीक्षा की। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने ब्लॉक स्तर तक लंबित मामलों की निगरानी, तकनीकी समस्याओं के समाधान और डिजिटल भुगतान प्रणाली को गति देकर पूरी व्यवस्था को परिणाममुखी बनाया।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में लंबित मामलों की दैनिक समीक्षा की।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त करना जनपद के लिए गर्व का विषय है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल रैंकिंग हासिल करना नहीं बल्कि प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि अब शत-प्रतिशत भुगतान, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, प्रसवपूर्व जांच और संस्थागत प्रसव को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
ध्वस्त होती स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से उबरकर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करना इस बात का प्रमाण है कि प्रभावी नेतृत्व, पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था, सतत मॉनिटरिंग और समर्पित टीमवर्क से सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सकता है। फर्रुखाबाद की यह उपलब्धि अब उत्तर प्रदेश के अन्य जनपदों के लिए भी एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरी है।


