जनवादी लेखक संघ का जिला का जिला सम्मेलन संपन्न
फर्रुखाबाद। जनवादी लेखक संघ का सातवां जिला-सम्मेलन संपन्न हुआ। जिसमें जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव प्रो0 नलिन रंजन सिंह, जनवादी लेखक संघ, उत्तर प्रदेश के कार्यकारी सचिव ,डा0 ज्ञान प्रकाश चौबे, जनवादी लेखक संघ की केन्द्रीय कार्यकारिणी की सदस्य साहित्यकार डा0 शालिनी सिंह व समीना खानने शिरकत की।सम्मेलन के पहले सत्र में अतिथियों के परिचय के बाद संगठन पर चर्चा हुई।
सम्मेलन का उदघाटन मुख्य अतिथि प्रो0 नलिन रंजन सिंह जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव ने किया।सुनील कुमार ने पिछले सालों में किये गये कार्यरिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट पर अंजली सैनी ने अपने विचार रखे। तत्पश्चात कई संशोधनों के साथ रिपोर्ट को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।सर्वसम्मत से 16 सदस्यीय कार्यकारिणी चुनी गई, जिसमें पांच स्थान रिक्त रखे गये हैं। कार्यकारिणी में हरिनंदन सिंह यादव को अध्यक्ष, सतीश चंद्र सतीश, अंजली सैनी व साक्षी मौर्य को उपाध्यक्ष, गीता भारद्वाज को सचिव, सुनील कुमार , महेश वर्मा तथा प्रियल मिश्रा को उपसचिव एवं सुषमा कटियार को कोषाध्यक्ष चुना गया।
द्वितीय सत्र विचार सत्र रहा, जिसका विषय ” साझा विरासत, जनपक्षधरता और लेखक ” था। जिसकी अध्यक्षता हरिनंदन सिंह यादव तथा संचालन गीता भारद्वाज ने किया।अंबेडकर मूर्ति पर पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ।अतिथियों व जनवादी लेखक संघ सदस्यों के सम्मान के बाद जलेस,उत्तर-प्रदेश के कार्यकारी सचिव डा0ज्ञान प्रकाश चौबे ने खुले सत्र का उदघाटन किया। अपने उदघाटन भाषण में उन्होने साझा विरासत व जनपक्षधरता के महत्व को उजागर करते हुये इसे आगे बढ़ाने इसे अक्षुण रखने का आह्वान किया। प्रसिद्ध कहानीकार तथा जलेस केन्द्रीय सचिव मंडल की सदस्य समीना खान ने साहित्य में हिंदू मुस्लिम एकता की रवायत की मिसाल देते हुये फर्रुखाबाद जनपद में जन्में मशहूर अंतर्राष्ट्रीय शायर गुलाम रब्बानी तांबा का जिक्र किया।जनवादी लेखक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य व प्रमुख साहित्यकार डा0 शालिनी सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुये लेखकों को आम आदमी के पक्ष में खड़े होने की अपील करते हुये साहित्य को जन-जन तक पहुचाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि प्रो0 नलिन रंजन सिंह ने कहा कि हमारी साझा विरासत को वैदिक काल से लेकर उत्तर वैदिक काल, बौद्ध काल तथा वृहद्रथ की हत्या के बाद पुष्यमित्र शुंग द्वारा समाज में विभेद पैदा कर वर्ण आधारित समाज की रचनाकर गुलामी करने वाला वर्ण शूद्र बना दिया। उन्होंने कहा कि मध्य काल को मुस्लिम काल बताने वाले भूल जाते हैं कि युद्ध में जीतने वाले का शासन होता था तथा दोनों तरफ से हिंदू और मुसलमान लड़ते थे। यही वह काल था जब भक्ति आंदोलन का उदय हुआ। कबीर, नानक, मीरा, तुलसीदास, सूरदास,रहीम दास, रैदास, अमीर खुसरो,रसखान आदि के साथ-साथ स्थापत्य कला, व संस्कृति अपने परवान चढ़ी। उन्होंने आगे कहा कि आम पीड़ित जनता के लिये साहित्य सृजन करना ही जनपक्षधरता है और यही लेखकीय दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि हमारी साझी विरासत की वजह से तमाम अंतर्विरोधों के रहते हुये भी हमारे देश की एकता बहुत मजबूत है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से जवाहर सिंह गंगवार एडवोकेट, वरिष्ठ साहित्यकार डा0 राजकुमार सिंह, सुधीर सिंह, देवकी नंदन गंगवार, बलवीर सिंह, रामप्रकाश सैनी, नरवीर सिंह पाल, सुखवासी लाल, अनीस अहमद, देवा यादव, शुभाशीष पाल शुभ,शिव कुमार , जगमोहन गौतम आदि मौजूद रहे।
हमारी साझी विरासत की वजह से देश क एकता मजबूत – नलिन रंजन सिंह


