शरद कटियार
जीवन का सबसे कठिन संघर्ष बाहर के लोगों से नहीं होता, बल्कि तब होता है जब अपने ही लोग आपका साथ देने के बजाय आपकी कमियाँ गिनाने लगते हैं। जिन हाथों से कभी हौसला मिलने की उम्मीद होती है, वही हाथ जब उँगली उठाने लगें; जिन आँखों में अपनापन ढूँढ़ते हैं, वही आँखें केवल आपकी गलतियाँ देखने लगें तब मनुष्य भीतर से सबसे अधिक टूटता है।
हर व्यक्ति चाहता है कि उसके जीवन की कठिन राहों में कुछ लोग ऐसे हों, जो बिना शर्त उसके साथ खड़े रहें। जो उसकी सफलता पर मुस्कुराएँ, असफलता में उसका हाथ थामें और कमियों को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने के बजाय उन्हें सुधारने का अवसर दें। लेकिन जीवन हमेशा हमारी इच्छाओं के अनुसार नहीं चलता। कई बार सबसे गहरे घाव वे लोग दे जाते हैं, जिनसे सबसे अधिक अपनापन होता है।
एक विचित्र सत्य यह भी है कि समाज आपकी उपलब्धियों से अधिक आपकी कमियों को याद रखता है। आपने वर्षों तक ईमानदारी से काम किया हो, सैकड़ों लोगों की मदद की हो, अनगिनत उपलब्धियाँ हासिल की हों, लेकिन एक छोटी-सी भूल उन सब पर भारी पड़ जाती है। कुछ लोग आपकी अच्छाइयों को देखने की दृष्टि खो देते हैं और केवल कमियों की सूची बनाने में लग जाते हैं।
लेकिन क्या वास्तव में यह आपकी हार है? शायद नहीं।
जब लोग आपकी कमियाँ गिनाने लगें, तब यह भी समझना चाहिए कि आपने कुछ ऐसा अवश्य किया है जो उन्हें दिखाई देता है। जो व्यक्ति चल ही नहीं रहा, उसकी ठोकरों की चर्चा भी नहीं होती। पत्थर उसी पेड़ पर फेंके जाते हैं, जिस पर फल लगे होते हैं।
यह भी सच है कि आलोचना दो प्रकार की होती है। एक वह, जो आपको गिराने के लिए की जाती है; दूसरी वह, जो आपको बेहतर बनाने के लिए होती है। बुद्धिमानी इसी में है कि दोनों के बीच का अंतर पहचाना जाए। जो व्यक्ति प्रेम से आपकी त्रुटि बताता है, वह आपका हितैषी है। लेकिन जो हर समय केवल आपकी कमियों को ही आपकी पहचान बना दे, वह शायद आपकी प्रगति से अधिक आपकी असफलता में रुचि रखता है।
जीवन में ऐसे लोग भी मिलते हैं जो आपकी उपलब्धियों पर मौन रहते हैं, लेकिन आपकी छोटी-सी चूक पर सबसे पहले टिप्पणी करते हैं। उन्हें आपकी यात्रा नहीं दिखाई देती, केवल आपका ठहराव दिखाई देता है। वे आपके संघर्ष नहीं देखते, केवल परिणाम देखते हैं। ऐसे लोगों से शिकायत करने की आवश्यकता नहीं है। समय स्वयं सबसे बड़ा उत्तर देता है।
कभी-कभी अपने ही लोगों से अपेक्षाएँ कम कर देना भी मानसिक शांति का मार्ग बन जाता है। हर व्यक्ति आपकी सोच, आपके संघर्ष या आपके सपनों को नहीं समझ सकता। इसलिए अपनी ऊर्जा उन लोगों को समझाने में व्यर्थ न करें, जिन्होंने पहले ही आपको गलत समझने का निर्णय ले लिया है।
याद रखिए, यदि आपका व्यक्तित्व केवल दूसरों की स्वीकृति पर टिका है, तो एक दिन उनकी अस्वीकृति आपको तोड़ देगी। लेकिन यदि आपका आत्मविश्वास आपके चरित्र, आपके कर्म और आपके उद्देश्य पर आधारित है, तो दुनिया की कोई आलोचना आपको लंबे समय तक रोक नहीं सकती।
जीवन का सबसे बड़ा उत्तर शब्दों में नहीं, उपलब्धियों में होता है। बहस जीतकर नहीं, स्वयं को बेहतर बनाकर जीतिए। समय आने पर वही लोग, जो आज आपकी कमियाँ गिना रहे हैं, आपकी सफलता की चर्चा करेंगे।
इसलिए जब अपने ही आपका महत्व न समझें, तब स्वयं का मूल्य कम मत आँकिए। हीरा अपनी चमक इसलिए नहीं खो देता कि किसी ने उसे पत्थर समझ लिया। सूर्य इसलिए उगना बंद नहीं करता कि किसी ने उसकी रोशनी की प्रशंसा नहीं की।
जो लोग केवल कमियाँ देखते हैं, वे आपके व्यक्तित्व की ऊँचाई नहीं माप सकते। और जो लोग आपका मूल्य नहीं समझते, उनके निर्णय से आपका मूल्य कभी कम नहीं हो जाता।
इसलिए चलते रहिए, सीखते रहिए, निखरते रहिए। क्योंकि अंततः जीवन में सबसे महत्वपूर्ण यह नहीं कि कितने लोगों ने आपकी आलोचना की, बल्कि यह है कि आपने उन आलोचनाओं के बीच अपने व्यक्तित्व को कितना ऊँचा बनाया।


