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Tuesday, July 7, 2026

होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर बढ़ा तनाव: 24 घंटे में तीन तेल टैंकरों पर हमले

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वैश्विक समुद्री सुरक्षा और तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम लागू होने के बावजूद पश्चिम एशिया में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सके हैं। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य में महज 24 घंटे के भीतर तीन तेल एवं गैस टैंकरों पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं के बाद वैश्विक समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर फिर से आशंकाएं गहरा गई हैं।

ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी (UKMTO) के अनुसार, ओमान के तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से गुजर रहे तीन व्यावसायिक टैंकर अलग-अलग घटनाओं में हमलों का शिकार हुए। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक हमलों में ड्रोन और अन्य संदिग्ध हथियारों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। एक एलएनजी (LNG) टैंकर में आग लग गई, जबकि उसे मामूली संरचनात्मक नुकसान पहुंचा। राहत की बात यह रही कि किसी भी जहाज के चालक दल के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है।

ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि संबंधित एलएनजी टैंकर ने सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी की अनदेखी की थी, जिसके बाद कार्रवाई की गई। हालांकि ईरान ने इन हमलों की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं ली है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और क्षेत्र से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है। यदि ऐसी घटनाएं जारी रहती हैं तो वैश्विक शिपिंग कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ने के साथ-साथ तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।

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