NDA सहयोगियों संग नितिन नवीन की मैराथन बैठक
लखनऊ।प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को लखनऊ में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों के नेताओं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग दौर की महत्वपूर्ण बैठकें कीं। बैठकों में आगामी चुनाव की रणनीति, संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और गठबंधन को और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर, अपना दल (एस) की नेता अनुप्रिया पटेल के पति एवं कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल तथा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के महासचिव त्रिलोक त्यागी से करीब 10-10 मिनट तक अलग-अलग मुलाकात की। बैठक के बाद संजय निषाद, ओम प्रकाश राजभर और आशीष पटेल ने स्पष्ट किया कि बातचीत के दौरान सीटों के बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई। उनका कहना था कि बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार करना और गठबंधन को और मजबूत बनाना था।
बैठकों के दौरान संगठन विस्तार, सामाजिक समीकरण, विभिन्न वर्गों तक सरकार की योजनाओं को पहुंचाने और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने जैसे मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। भाजपा नेतृत्व ने सहयोगी दलों से समन्वय बढ़ाने और संयुक्त रूप से चुनावी तैयारी में जुटने का आह्वान किया।
इसी क्रम में भाजपा नेता अपर्णा यादव ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। नितिन नवीन ने उनके पति प्रतीक यादव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई।
इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ भी अहम बैठक की। सूत्रों के अनुसार बैठक में प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, बदलते जातीय समीकरणों, संगठन की मजबूती और आगामी चुनावी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों और सुझावों को भी गंभीरता से सुना।
हालांकि इस बैठक में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय कटियार की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।
भाजपा नेतृत्व की इन लगातार बैठकों को उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की औपचारिक चुनावी तैयारी की शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी अभी से संगठन और सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत कर चुनावी बढ़त बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।


