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Thursday, July 2, 2026

2027 का चुनावी बिगुल, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने में जुटें कार्यकर्ता, डॉ. सोनेलाल पटेल जयंती पर अनुप्रिया का बड़ा संदेश

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लखनऊ। अपना दल (एस) के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर गुरुवार को राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित “जन स्वाभिमान दिवस” कार्यक्रम के साथ पार्टी ने वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का राजनीतिक शंखनाद कर दिया। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कार्यकर्ताओं से अभी से गांव, वार्ड और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का आह्वान करते हुए कहा कि जनता के विश्वास और कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर अपना दल (एस) आगामी विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करेगा।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि जिस पार्टी को कभी राजनीतिक विरोधी वोट कटवा कहते थे, वही आज उत्तर प्रदेश विधानसभा में 13 विधायकों के साथ एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बन चुकी है। उन्होंने सामाजिक न्याय, पिछड़े, दलित, वंचित और शोषित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को पार्टी की प्राथमिकता बताते हुए जातीय जनगणना, विशेष रूप से ओबीसी गणना, ओबीसी कल्याण मंत्रालय और क्रीमी लेयर की आय सीमा बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

कार्यक्रम में प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल, अमन पटेल, पार्टी के विधायक, पदाधिकारी और प्रदेशभर से पहुंचे हजारों कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान “हर घर झंडा अभियान” को जनआंदोलन का रूप देने तथा बूथ स्तर तक संगठन का विस्तार करने का संकल्प भी दिलाया गया। साथ ही विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े बृजेश कश्यप, गौरव प्रतीक और रामरेख वर्मा सहित कई प्रमुख लोगों ने अपना दल (एस) की सदस्यता ग्रहण की।

डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर देश के शीर्ष नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें सामाजिक न्याय का अग्रदूत बताते हुए नमन किया। नेताओं ने कहा कि डॉ. सोनेलाल पटेल का वंचितों, पिछड़ों और किसानों के अधिकारों के लिए किया गया संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

उल्लेखनीय है कि डॉ. सोनेलाल पटेल का जन्म 2 जुलाई 1950 को कन्नौज जिले के बागुलहाई गांव में हुआ था। उन्होंने सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ लंबा संघर्ष किया तथा अपना दल की स्थापना कर पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज को नई पहचान दी। वर्ष 2009 में कानपुर में एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया था, लेकिन उनकी विचारधारा आज भी पार्टी की राजनीति का आधार मानी जाती है।

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