नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी गठबंधन ने एक बार फिर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गठबंधन के 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत को संयुक्त पत्र भेजकर मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का उपयोग चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है तथा इसकी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से पत्र की जानकारी देते हुए बताया कि आठ जून को हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। पत्र पर 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद के हस्ताक्षर हैं। बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे , राहुल गाँधी , अखिलेश यादव , ममता बनर्जी , उमर अब्दुल्लाह और सुप्रिया सुले सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। बैठक में अनुपस्थित रहने वाले कुछ दलों ने भी बाद में इस पत्र पर हस्ताक्षर किए।चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध बनाने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया था। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले इसका प्रारंभिक चरण लागू किया गया, जिसके बाद देश के विभिन्न राज्यों में यह प्रक्रिया शुरू की गई। विपक्ष का दावा है कि इस दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल फर्जी और अवैध नामों को हटाकर मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि किसी भी वास्तविक भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा और केवल नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। इस बीच, Supreme Court of India पहले ही अपने हालिया निर्णय में चुनाव आयोग को विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का अधिकार दे चुका है तथा इस प्रक्रिया के खिलाफ दायर आपत्तियों को खारिज कर चुका है। इसके बावजूद विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मामले में दोबारा हस्तक्षेप की मांग की है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।


